सिंधिया को प्रियंका का साथ, सोनिया की दरकार

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प्रदेश अध्यक्ष के जिस पद पर सिंधिया की निगाह है, वहां तक पहुंचने के लिए ज्योति सिंधिया को प्रियंका गांधी का साथ तो मिल रहा है, लेकिन सोनिया गांधी की भी जरूरत है। चुनाव हारने के बाद से सिंधिया नई कुर्सी की तलाश में हैं और वो कुर्सी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की है। जितनी आसानी से वो लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे, उतनी आसानी से अध्यक्ष पद उनके पास आता हुआ दिख रहा था। वो सब दूर होता गया।

जब सिंधिया ने पहले दिल्ली में पकड़ मजबूत की, प्रियंका गांधी का साथ पकड़ा और सोनिया गांधी तक अपनी आवाज पहुंचाने लगे, क्योंकि अब राहुल मदद नहीं कर रहे। सिंधिया को अब प्रियंका गांधी के अलावा सोनिया गांधी का साथ भी चाहिए। सोनिया का साथ इतना आसान नहीं है, क्योंकि कमलनाथ से ज्यादा मजबूत वहां कोई नहीं है। दिग्विजयसिंह और कमलनाथ ने अध्यक्ष की कुर्सी तक जाने से सिंधिया को रोक रखा है। सिंधिया को गुलाम नबी आजाद और अहमद पटेल का साथ भी नहीं मिल रहा है, इसलिए सिंधिया ने लोकप्रियता का पैमाना पकड़ा।

कार्यकर्ताओं के बहाने अब प्रदेश के दौरे करने लग गए। विधायक और नेताओं के घर जाने के साथ ही कार्यकर्ताओं से मिलने का सिलसिला शुरू किया। सिंधिया के दिल में कुछ और है, दिखा कुछ और रहे हैं और करना कुछ और चाहते हैं। प्रदेश का कोई और बड़ा नेता, सिंधिया के साथ नहीं है और उनके गुट के मंत्रियों में भी तुलसी सिलावट के अलावा कोई दम नहीं पकड़ पा रहा है। कल पहली बार ऐसा हुआ कि सिंधिया के मंच पर न केवल दिग्विजयसिंह, बल्कि अरुण यादव और सुरेश पचौरी के फोटो भी दिख रहे थे।

मंच पर लगे बैकड्राफ्ट पर लिखा था- एक मुलाकात, स्नेह भोज के साथ। ये नारा दिग्विजयसिंह के उस नारे की याद दिला रहा था, जो विधानसभा चुनाव के पहले उन्होंने दिया था- पंगत में संगत। कार्यकर्ताओं के साथ दिग्विजयसिंह जमीन पर भोजन करते देखे गए थे। कल सिंधिया ने कार्यकर्ताओं के साथ भोजन तो नहीं किया, लेकिन अधिकांश के साथ सेल्फी जरूर हुई। सिंधिया, हाईकमान को बताने की कोशिश में हैं कि कार्यकर्ताओं में सबसे ज्यादा लोकप्रिय वही हैं। बस यही संदेश सिंधिया को फायदा कर सकता है।
मौके से राजेश राठौर

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