संभागायुक्त द्वारा महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा

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संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी ने आज महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त बैठक लेते हुए निर्देश दिये कि इंदौर संभाग को कुपोषण से मुक्त करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाएं। बैठक में उपस्थित इंदौर संभाग के सभी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा महिला बाल विकास के कार्यक्रम अधिकारियों को उन्होंने निर्देशित किया कि वे परस्पर समन्वय से कार्य करें। महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य दोनों विभागों की संयुक्त रूप से जिम्मेवारी है।

बैठक में क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य डॉ लक्ष्मी बघेल, संयुक्त आयुक्त विकास चेतना फौजदार सहित संभाग के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास उपस्थित थे।

बैठक में त्रिपाठी ने संभाग के विभिन्न जिलों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के रिक्त पदों को भरने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया का पालन कर शीघ्र कार्यवाही प्रारंभ की जाए। श्री त्रिपाठी ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती में संबंधित अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया और नियम कानूनों के संबंध में बेहतर ढंग से प्रशिक्षित भी किया जाए। त्रिपाठी ने विभिन्न जिलों में बच्चों के पोषण स्तर की जानकारी भी ली। बैठक में बताए गए आंकड़ों पर उन्होंने कहा कि आंकड़े सत्य होने चाहिए।

एमआईएस और आईसीटी आरटीएम के आंकड़ों में अंतर पाए जाने पर उन्होंने कहा कि इसे सही-सही इंद्राज किया जाए। महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक को कुपोषण मुक्त इंदौर संभाग की कार्ययोजना बनाए जाने के निर्देश उन्होंने दिए। इस संबंध में विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक तैयारियों पर उन्होंने असंतोष जताया और इस कार्ययोजना को परिणाममूलक बनाए जाने के निर्देश दिए।

त्रिपाठी ने महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि दोनों के मैदानी अमले की संयुक्त बैठक ब्लाक और सेक्टर लेवल पर होना चाहिए। बैठक सेक्टर स्तर पाक्षिक और ब्लॉक स्तर पर मासिक रूप से होनी चाहिए।

बैठक में बताया गया कि अनमोल सॉफ्टवेयर स्वास्थ्य विभाग का है, जिसके जरिए गर्भवती महिलाओं की ए.एन.सी. और टीकाकरण की मॉनिटरिंग की जा रही है। संभागायुक्त श्री त्रिपाठी ने कहा कि किसी बच्चे के लिए जीवन चक्र के प्रथम 1000 दिवस विशेष महत्व के हैं। कुपोषण से बच्चे को दूर रखने के लिए गर्भ के 9 माह के 270 दिन और जन्म के प्रथम 2 वर्ष के 730 दिनों में विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इस अवधि में महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग बच्चों पर विशेष ध्यान दें।

कमिश्नर त्रिपाठी ने राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत चिकित्सकों के ग्रामीण अंचल में भ्रमण कार्यक्रम से पहले महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले को अवगत कराया जाए। इसकी प्राथमिक सूचना आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सेक्टर सुपरवाइजर को दी जाए, ताकि वह गांव में डॉक्टर के आने पर बच्चे का मेडिकल परीक्षण करा सकें। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को चेतावनी दी कि राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत चल रही मोबाइल मेडिकल टीम केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, इसे परिणाम मूलक बनाएं एवं महिला बाल विकास विभाग के मैदानी अमले से बेहतर समन्वय रखा जाए। त्रिपाठी ने 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग की शाला त्यागी किशोरियों के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने के लिए कहा।

बैठक में लाड़ली लक्ष्मी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सहित आंगनवाड़ी में स्वसहायता समूह द्वारा दी जा रही खाद्य सामग्री की स्थिति की भी समीक्षा की गई। निर्माणाधीन आंगनवाड़ी केंद्रों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। कमिश्नर श्री त्रिपाठी ने कहा कि भवन विहीन आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए वैकल्पिक तौर पर कलेक्टर की सहायता से स्कूल का एक कक्ष आवंटित कराएं।

संभागायुक्त त्रिपाठी ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा भी की। उन्होंने टीकाकरण, पीसी एण्ड पीएनडीटी एक्ट, दस्तक अभियान की जानकारी ली। दस्तक अभियान में बुरहानपुर जिले में प्रगति कम पाए जाने पर उन्होंने क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य को वहां जाकर प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। त्रिपाठी ने कहा कि जिला अस्पतालों में जिन मशीनों का उपयोग नहीं हो पा रहा है ऐसी मशीनें तत्काल दुरुस्त कराई जाए। जो मशीनें दुरुस्ती योग्य नहीं है, उन्हें विधिवत प्रक्रिया का पालन कर कंडम घोषित कराया जाए, ताकि नई मशीनें आ सकें।

त्रिपाठी ने संस्थागत प्रसव की भी समीक्षा की। खंडवा में उन्होंने मेडिकल कालेज और सीएमएचओ को बेहतर तालमेल से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

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