5 वर्षों में 48 प्रतिशत दलबदलू नेता ही जीत सके चुनाव

नई दिल्ली: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का हो हल्ला शुरू हो गया है वहीं भाजपा सहित अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा भी दल बदलने का सिलसिला शुरू है।

नई दिल्ली: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का हो हल्ला शुरू हो गया है वहीं भाजपा सहित अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा भी दल बदलने का सिलसिला शुरू है। इधर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें वर्ष 2016 से लेकर 2020 तक की यह जानकारी दी गई है कि जिन नेताओं ने इस दौरान अपने दल बदलकर चुनाव लड़े हैं उनमें से महज 48 प्रतिशत ही नेताओं को चुनाव जीतने में सफलता प्राप्त हुई है। रिपोर्ट के अनुसार इन पांच वर्षों में कुल 357 नेताओं ने अपने दल बदलकर चुनाव लड़े तो सही लेकिन इनमें से महज 170 ही चुनाव की जीत का जश्न मना सके। अर्थात 48 प्रतिशत को सफलता मिली और 187 नेताओं को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

रिपोर्ट के अनुसार इन पांच साल के अंदर जीतने वाले भी ज्यादातर वह प्रत्याशी रहे जो दूसरी पार्टी छोड़कर भाजपा में पहुंचे थे। पार्टी ने ऐसे 67 नेताओं को टिकट दिया था, जिसमें 54 जीत गए। लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा और हैरान करने वाला है। इसमें कुल 12 नेताओं ने एक पार्टी छोड़कर दूसरे के टिकट पर चुनाव लड़ा और सभी हार गए। विधानसभा उपचुनाव में दल बदलने वाले नेताओं की परफॉरमेंस अच्छी रही है। ऐसे 48 नेताओं ने चुनाव लड़ा और इसमें 39 यानी 81% को जीत मिली। राज्यसभा चुनाव में दल बदलकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं को 100% सफलता मिली है। इसके पीछे सदस्यों की तय संख्या का वोट करना होता है। इसमें चुनाव पब्लिक को नहीं बल्कि सदन के नेताओं को ही करना होता है। मध्य प्रदेश, मणिपुर, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और कर्नाटक में विधायकों के दल बदलने के चलते सरकार गिर गई थी।  2019 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के पांच सांसदों ने अन्य दलों में जाने के लिए पार्टी छोड़ दी थी।