सूत्रों के अनुसार उत्तरप्रदेश (UP) के कुशीनगर रेलवे स्टेशन में खड़ी सत्याग्रह एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15273) के अंदर कुछ लोगों के द्वारा नमाज पड़ने की जानकारी मिली है और साथ ही इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में ट्रैन की बोगी में नीचे रास्तों पर बैठकर कुछ लोगों के द्वारा सामूहिक नमाज पड़ी जा रही थी जिसकी वजह से ट्रैन में चढ़ने और ट्रैन से उतरने वाले यात्रियों को काफी असुविधा का भी सामना करना पड़ गया। इसके साथ ही इस दौरान ट्रेन में चढ़े लोगों को अपनी सीटों पर बैठने के लिए काफी जद्दोजहद करना पड़ी।

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बीजेपी के पूर्व विधायक दीपलाल भारती ने बनाया वीडिओ

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुशीनगर रेलवे स्टेशन में खड़ी सत्याग्रह एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15273) के अंदर कुछ लोगों के द्वारा नमाज पड़ने का जो वीडिओ सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर वायरल हुआ है वो वीडिओ भारतीय जनता पार्टी के एक पूर्व विधायक दीपलाल भारती ने बनाया है। पूर्व विधायक ने बताया की वे उक्त ट्रैन से कप्तानगंज की यात्रा कर रहे थे तब कुशीनगर रेलवे स्टेशन पर ट्रैन के अंदर ही बोगी में बने रास्ते पर चटाई बिछाकर नमाज पढ़ते लोग दिखाई दिए, जिनकी वजह से अन्य यात्री अपनी सीटों पर बैठने और चढ़ने उतरने में असमर्थ दिखाई दिए। उन्होंने बताया के मैंने तुरंत ही अपने मोबाईल से इस घटना का वीडिओ बनाया और जीआरपी को भेज दिया, उन्होंने बताया की उक्त वीडिओ 28 सेकेण्ड का है।

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पूर्व विधायक ने कहा की मिलना चाहिए सजा

सत्याग्रह एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15273) के अंदर कुछ लोगों के द्वारा नमाज पड़ने का वीडियो बनाने वाले भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक दीपलाल भारती के अनुसार इस प्रकार से ट्रैन में या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर रास्ता रोक कर नमाज पढ़ना सरासर गलत और साथ दंडनीय अपराध भी है, जिसके लिए मैं उक्त सभी लोगों को गिरफ्तार करके सजा दिए जाने की मांग करता हूँ।

कितना सही या गलत है यूँ नमाज पढ़ना

प्रश्न उठता है कि इस प्रकार से सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ना कितना सही अथवा कितना गलत है। अपने ईश्वर या आराध्य की किसी भी प्रकार की आराधना गलत नहीं होती, परन्तु यूँ रास्ता रोककर या फिर अन्य व्यक्तियों को असुविधा में डालकर यूँ अपने खुदा की नमाज के नाम पर इबादत आखिर कितनी जायस है यह सभी के लिए सोचने का विषय है और साथ ही इस मामले में उचित निर्धारण की भी अत्यंत आवश्यकता है, क्योंकि दिनबदिन इस प्रकार के मामले देखने को मिलते ही रहते हैं।