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बेवकूफ, मज़बूर, लालची घर के बाहर !

डॉ. शैलेन्द्र भण्डारी 

कोरोना के भीषण वीभत्स और विप्लव के बावज़ूद जो लोग घर से बाहर निकल रहे हैं, उन्हें अपनी श्रेणी निर्धारित करना चाहिए, अन्यथा घर के भीतर सुरक्षित रहना चाहिए. जो लोग घर के बाहर कार्यवश, अकार्यवश या उत्सुकतावश निकल रहे हैं, उनमे से अधिकांश बेवकूफ़ हैं और मौत को खुला निमंत्रण दे रहे हैं. जो अपनी नौकरी बचाने के लिये, दैनिक आमदनी से घर चलाने के लिये, बैंक ई एम आई की व्यवस्था करने के लिये, अपने इलाज़ के लिये या अन्तिम संस्कार के लिये निकल रहे हैं, वे बेशक़ मज़बूर हैं.

जो चिकित्सक, व्यवसायी या उद्योगपति लखपति से करोड़पति और करोड़पति से अरबपति बनने के, भीषण मानव त्रासदी में अवसर तलाश रहे हैं, वे शर्तिया लालची हैं, मानवता के लिये कलंक हैं. जो डॉक्टर और अस्पताल कोरोनाकाल में इंसानियत को पूर्णतः निःशुल्क सेवाएँ प्रेषित कर रहे हैं, सिर्फ़ वे ही तालियाँ, थालियाँ, घंटियां, फूल एवं अभिनन्दन के हक़दार हैं. आदमी बेतहाशा आर्थिक विखंडन के दौर से गुज़र रहा है और आपका डॉक्टर और अस्पताल मरीज़ को समयकालिक मुस्कानी सेवाएँ नहीं दे पा रहे, एम्बुलेंस, बिस्तर, दवाइयां, वेंटीलेटर मुहैया नहीं कर पा रहे, आपकी कमजोर, लचर और बीमार स्वास्थ्य सेवाएँ लाशों के अम्बार लगा रही हों, तो तालियाँ किस बात की बज रही हैं