Minimum Wage: देश में देखा जाए तो सबसे ज्यादा गरीबी बढ़ती जा रही है और अब देश से गरीबी मिटाने के लिए और गरीबों का जीवन स्तर पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार बड़ी तैयारी कर रही है। इसके लिए श्रम मंत्रालय न्‍यूनतम मजदूरी की परिभाषा बदलने पर भी विचार कर रहा है। दिहाड़ी मजदूरों को अब मिनिमम वेज (न्‍यूनतम मजदूरी) के बजाए लिविंग वेज देने पर विचार किया जा सकता है। इसमें महंगाई को ध्‍यान में रखते हुए बदलाव किए जाएंगे।

ये है सरकार की योजना

इकोनॉमिक टाइम्‍स के मुताबिक, दिहाड़ी मजदूरों की हालत सुधारने के लिए और 2030 तक लाखों मजदूरों को अति गरीबी से निकालने के लिए श्रम मंत्रालय मिनिमम वेज न देकर लिविंग वेज देने की योजना बना रही है। श्रम मंत्रालय में इस योजना के लिए तेजी से मंथन चल रहा है। मामले से जुड़े एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि इसके लिए अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन (ILO) से भी मदद ली जाएगी, ताकि इस योजना को धरातल पर उतारने में मदद मिले।

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श्रम मंत्रालय ने अपने अधिकारियों से कहा है कि इस बदलाव से होने वाले नफा-नुकसान का मूल्‍यांकन कर रिपोर्ट बनाएं। साथ ही यह भी देखें कि इस कदम से आर्थिक, सामाजिक और वित्‍तीय रूप से क्‍या असर पड़ेगा। ILO के सदस्‍यों ने इस बारे में ज्‍यादा जानकारी और लिविंग वेज को समझने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र से भी मदद मांगी है। भारत भी ILO के संस्‍थापक सदस्‍यों में शामिल है।

क्या है ये बदलाव?

गौरतलब है कि लिविंग वेज मजदूरों की जिंदगी छोटी जरूरतों को पूरी करने के लिए दिया जाता है, जबकि मिनिमम वेज कानून से फिक्स होता है यानी इसमें काम के बदले आमदनी का नियम होता है। आपको बता दें कि भारत में अभी मिनिमम वेज यानी न्‍यूनतम मजदूरी 178 रुपये है। जबकि अगर इसकी जगह लिविंग वेज दिया जाए तो यह रकम करीब 25 फीसदी बढ़ सकता है।