महाराष्ट्र : फ्लोर टेस्ट पर मामला टला, सुप्रीम कोर्ट कल देगा फैसला

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Suprime Court

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में एक महीने से चल रहा सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य की राजनीति में तब नया मोड़ आ गया जब भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की और एनसीपी के बागी अजीत पवार ने डिप्टी सीएम की शपथ ली। इस घटनाक्रम से कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी चकित रह गई। अब तीनों पार्टियों ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में राज्यपाल के निर्णयों को चुनौती दी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में दूसरे दिन सुनवाई हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 26 नवंबर तक फैसला सुरक्षित रख लिया है। रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट के लिए कोई महीनों का समय नहीं दिया है। उन्होंने 30 नवंबर को फ्लोर टेस्ट कराने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल को 24 घंटे के भीतर फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश नहीं दे सकता। ये कह रहे हैं कि कोर्ट सत्र बुलाए और ये भी तय करे कि को कब नाश्ता करेगा और कब लंच करेगा। मुकुल रोहतगी ने कहा कि पूर्व में कोर्ट ने संसद की कार्रवाई में दखल देने से मना किया था। इनका केस यह है कि आज ही फ्लोर टेस्ट हो। तुषार मेहता ने कहा कि ये लोग एक याचिका दायर कर यहां आए हैं और एक वकील पर तो सहमत नहीं हो पाए. गठबंधन में सहमत कैसे हो पाएंगे. कोर्ट में सब हंसने लगे। जस्टिस रमना ने कहा, क्या आदेश देना है, ये हम पर छोड़ दें।

सुप्रीम कोर्ट ने सिंघवी को कहा कि अपनी दलीलों को याचिका कि मांगों तक सीमित रखिए। इस पर सिंघवी ने कहा कि श्डलसवतक आपका कहना सही है. मगर वे बातें अंतरात्मा को धक्का पहुंचती है, जब कोई कोर्ट में खड़ा होकर कहता है कि मैं एनसीपी हूं। तुषार मेहता ने कहा कि जो नई चिट्ठी ये कोर्ट को दे रहे हैं, उसमें भी कई विधायकों के नाम पते नहीं है। आपके अनुसार हम फ्लोर टेस्ट हारने को तैयार हैं, तो फ्लोर टेस्ट तय समय पर होने दो।

सिंघवी ने कहा कि अजीत पवार को विधायक दल का नेता चुनने के लिए किए गए विधायकों के हस्ताक्षर राज्यपाल को दिए गए पत्र में लगा दिए गए हैं। सिंघवी ने कहा कि मैं इन बातों पर जोर नहीं देना चाहता, मगर ये बातें अपने आप में आधार हैं। फ्लोर टेस्ट आज ही हो जाना चाहिए। सिंघवी और रोहतगी में बहस होने पर जस्टिस रमना ने दोनों को शांत होने के लिए कहा। एनसीपी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि दोनों पक्ष फ्लोर टेस्ट को सही कह रहे हैं तो फिर इसमें देर क्यों? इसी तर्क के केस में कोर्ट के पुराने आदेश हमारे सामने हैं, उनकी उपेक्षा नहीं कि जा सकती। अनकवरिंग लेटर और अनएड्रेस लेटर को राज्यपाल ने कैसे स्वीकार किया।

शिवसेना के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि 22 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। ऐलान किया कि एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस मिलकर सरकार बना रही हैं। ये शाम को 7 बजे हुआ। सुबह 5 बजे तक राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला क्यों लिया गया? ऐसा राष्ट्रीय आपातकाल क्या था। यह दुर्भाग्यपूर्ण था। देश मे ऐसी क्या राष्ट्रीय विपदा आ गई थी कि सुबह 5 बजे राष्ट्रपति शासन हटा और 8 बजे मुख्यमंत्री की शपथ भी दिलवा दी गई। जिस तरह पीएम के कहने पर बिना कैबिनेट मीटिंग के फैसले हुआ, वह आपातकालीन प्रावधान है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि यह बात आपकी याचिका में नहीं है, इसे न बोलें। शिवसेना के वकील सिब्बल ने कहा कि कोर्ट को तत्काल फ्लोर टेस्ट का आदेश देना चाहिए। 24 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट होना चाहिए। कोर्ट ने पहले भी किया है, आज भी करना चाहिए। सबसे सीनियर मेंबर प्रोटेम स्पीकर होता है, वीडियो रिकॉर्डिंग होती है. कोर्ट को आदेश देना चाहिए।

अजीत पवार के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई वो कानूनी रूप से सही, फिर विवाद क्यों? अजित पवार ने कहा था कि मैं एनसीपी हूं. विधायक दल का नेता हूं। यही सही है, कोर्ट को आर्टिकल 32 के तहत इस याचिका को नहीं सुनना चाहिए। इन्हें हाईकोर्ट जाने को कहना चाहिए, अगर बाद में कोई स्थिति बनी है इसे राज्यपाल देखेंगे. उनके ऊपर छोड़ा जाए। कोर्ट इसमें दखल क्यों दें?।

तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि आपके आदेश का दूरगामी असर होगा। विस्तृत सुनवाई के बाद ही आदेश जारी करें, जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई वो कानूनी रूप से सही है। इस मामले में पूर्व के कुछ आदेशों के आधार पर अंतरिम आदेश न दें। इस मामले में हमें विस्तृत जवाब दायर करने दीजिए। अजीत पवार के वकील पूर्व सॉलिसिटर जनरल मनिन्दर सिंह ने कहा कि मैंने 22 नवंबर को एनसीपी विधायक दल के नेता के रूप में काम किया। उस दिन अन्यथा दिखाने के लिए कुछ भी नहीं था। राज्यपाल ने अपने विवेक से कार्य किया।

रोहतगी ने कहा कि अब जो होगा विधानसभा के फ्लोर पर होगा, लेकिन राज्यपाल पर आरोप क्यों? उन्होंने भी तो फ्लोर टेस्ट के लिए ही बोला है। फ्लोर टेस्ट कब होगा ये तय करने का अधिकार राज्यपाल का है। इसे कोर्ट को तय नहीं करना चाहिए। राज्यपाल पर आरोप लगाना गलत है। फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल को नहीं कहा जा सकता कि कितने दिन में कराना है। यह राज्यपाल का विवेकाधिकार है। राज्यपाल के कदम को दुर्भावना से प्रेरित नहीं कहा जा सकता। तुषार मेहता ने कहा कि इनको चिंता है कि विधायक भाग जाएंगे, अभी इन्होंने किसी तरह से उनको पकड़ा हुआ है। विधानसभा की कार्रवाई कैसे चले? इसमें दखल से भी कोर्ट को परहेज करना चाहिए। राज्यपाल की तरफ से पेश हुए तुषार मेहता ने कहा कि मुझे दो से तीन दिन का वक्त दिया जाए, ताकि रिप्लाई फाइल किया जा सके।

देवेंद्र फडणवीस के वकील मुकुल रोहतगी ने दलील देते हुए कहा कि अजित पवार ने कहा कि हमारा समर्थन आपके साथ है। वे लोग हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं और हम पर आरोप लगा रहे हैं। हमारे चुनाव पूर्व साथी शिवसेना ने चुनाव के बाद हमारा साथ छोड़ दिया। फिर एनसीपी आई और हमारे सदस्य 170 हो गए। राज्यपाल ने हमें आमंत्रण दिया। अजीत पवार हमारे साथ हैं। एक पवार दूसरी तरफ बैठे हैं। जिनके पारिवारिक झगड़े से हमे कोई लेना देना नहीं है। ये केस येदिरपप्पा मामले से अलग है। मामले पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है, इसे हड़बड़ी में नहीं निपटाया जा सकता। तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के पत्र के आधार पर राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की थी।

गवर्नर के वकील तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि देवेंद्र फडणवीस की चिट्ठी – जिसमें लिखा गया है, उनके साथ एनसीपी और 11 निर्दलीय विधायकों का समर्थन है। अजित पवार विधायक दल के नेता हैं। उन्होंने चिट्ठी पढ़ी, जिसमें कहा है कि मुझे सभी एनसीपी विधायकों का समर्थन है। हमने तय किया है कि फडणवीस को समर्थन दें। चिट्ठी में कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन ज्यादा नहीं चलने चाहिए, इसलिए उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया जाए। तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल ने अपने विवेक से सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाया है, उसका पर्याप्त आधार है।

राज्यपाल की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को अजित पवार की चिट्ठी सौंपी, जिसमें 54 विधायकों के नाम थे। उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर को चुनाव हुआ, 24 को नतीजा घोषित हुआ। भाजपा के 105 सदस्य है शिवशेना के 56 सदस्य एनसीपी के 54 सदस्य है। शिवसेना और भाजपा का प्री पोल अलाइंस था। सबसे पहले भाजपा को बुलाया गया वह बहुमत नहीं साबित कर पाए। उसके बाद शिवशेना को बुलाया गया वह भी बहुमत नहीं साबित कर पाए, उसके बाद भाजपा को बुलाया गया था।

राज्यपाल की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को अजित पवार की चिट्ठी सौंपी, जिसमें 54 विधायकों के नाम थे। उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर को चुनाव हुआ, 24 को नतीजा घोषित हुआ। भाजपा के 105 सदस्य है शिवशेना के 56 सदस्य एनसीपी के 54 सदस्य है। शिवसेना और भाजपा का प्री पोल अलाइंस था। सबसे पहले भाजपा को बुलाया गया वह बहुमत नहीं साबित कर पाए। उसके बाद शिवशेना को बुलाया गया वह भी बहुमत नहीं साबित कर पाए, उसके बाद भाजपा को बुलाया गया था।

केंद्र सरकार के वकील व साॅलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल ने 9 नवंबर तक इंतजार किया। भाजपा ने इनकार कर दिया। 10 तारीख को शिवसेना से पूछा तो उसने भी मना कर दिया। 11 को एनसीपी ने भी मना किया तो राष्ट्रपति शासन लगाया गया। उसके बाद से किसी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया। इस दौरान उन्होंने समर्थन वाली चिट्ठी कोर्ट में सौंपी।

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