करवा चौथ 2019: तो इसलिए चांद को छलनी से ही देखते हैं, ऐसे शुरु हुई परंपरा

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करवा चौथ का व्रत भारतीय महिलाओं के लिए बेहद ही खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है, साथ ही चांद को छलनी से देख कर पूजा कर पति के हाथों व्रत खोलती। क्या आपको पता है कि इस दिन चांद को छलनी से ही क्यो देखा जाता है अगर नहीं पता तो हम आपको आज अपनी खबर में बताएंगे कि चांद को छलनी से ही क्यों देखा जाता है।
छलनी से देखने का धार्मिक आधार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चांद को दीर्घायु का वरदान प्राप्त है साथ ही चांद की पूजा करने से दीर्घायु प्राप्त होती है। इसके अलावा चद्रंमा सुंदरता और प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। यही कारण है कि करवा चौथ के व्रत में महिलाएं चांद की पूजा करती हैं ताकि उनके पति को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिले। वहीं चांद को छलनी से देखने की बात करें तो चांद सुंदरता का प्रतीक है और उसे किसी की नजर न लग जाए इसलिए ही उसे छलनी की आढ़ से देखा जाता है।

करवा चौथ की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक साहूकार की बेटी ने अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था पर अत्यधिक भूख की वजह से उसकी हालत खराब होने लगी थी। यह देखकर साहूकार के बेटों ने अपनी बहन से खाना खाने को कहा लेकिन साहूकार की बेटी ने खाना खाने से मना कर दिया। भाइयों से बहन की ऐसी हालत देखी नहीं गई तो उन्होंने चांद के निकलने से पहले ही एक पेड़ पर चढ़कर छलनी के पीछे एक जलता हुआ दीपक रखकर बहन से कहा कि चांद निकल आया है।

बहन ने भाइयों की बात मान ली और दीपक को चांद समझकर अपना व्रत खोल लिया और व्रत खोलने के बाद उसके पति की मुत्यु हो गई। ऐसा कहा जाता है असली चांद को देखे बिना व्रत खोलने की वजह से ही उसके पति की मृत्यु हुई थी। तब से अपने हाथ में छलनी लेकर बिना छल-कपट के चांद को देखने के बाद पति के दीदार की परंपरा शुरू हुई है।

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