इंदौर। बाल निकेतन संघ (Bal Niketan Sangh) द्वारा वार्षिकोत्सव एक महत्वपूर्ण त्योहार की तरह मनाया जाता रहा है। यह विद्यालय के लिए आकर्षक का केंद्र है इस वर्ष भी वार्षिकोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह का आयोजन बाल निकेतन संघ परिसर में किया गया। इस कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर की कुलपति डॉ. रेणु जैन वहां मौजूद रही और उनका स्वागत बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ नीलिमा अदमने के द्वारा किया गया। बच्चों के अभिभावकगण व शहर के कई गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम को देखने के लिए समारोह स्थल पर पहुंचे व कार्यक्रम का आनंद उठाया। अंत में संघ के प्रिंसिपल श्री संदीप धाकड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया।

वार्षिकोत्सव में मनोरंजक गतिविधियों, जैसे कि सलाद सजावट, फूलों की सजावट, कला और शिल्प, रंगोली, क्रिसमस उत्सव, विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों जैसे नृत्य, संगीत, ऑर्केस्ट्रा तथा खेलकूद के साथ मनाया गया । अभिभावक अपने बच्चों की प्रस्तुति देखने हेतू उत्साहित थे। इसमें मांटेसरी शिक्षण पद्धति द्वारा खेल खेल में शिक्षा दी जाती हैं। नर्सरी से यु केजी तक के बच्चों ने मांटेसरी साधन सामग्री के माध्यम से उत्कृष्ट खेल पद्धति का प्रदर्शन किया जिसकी माननीय रेणु जैन अतिथि महोदया द्वारा बहुत सराहना की गई।

बच्चों ने दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए अपना सौ प्रतिशत दिया। समारोह में हर कक्षा के छात्रों ने भाग लिया। कुछ बच्चे डांस करते नजर आए तो कुछ रंगोली बनाते। बच्चों द्वारा स्वच्छ इंदौर पर प्रस्तुत किया गया नृत्य समारोह की खास पेशकश रही। हनुमानजी की जीवनी बताते हुए बच्चों ने हनुमान चालीसा पर एक खास प्रस्तुति दी जिसने सभी दर्शको का मन मोह लिया।

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर की कुलपति डॉ. रेणु जैन ने अपने शब्दों से छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों का भी मार्गदर्शन किया। उन्होंने संस्था के संस्थापकों के चरणो में प्रणाम करते हुए संस्था को पचहत्तर साल पूरे होने की बधाई देते हुए कहा की, “वह वास्तव में भाग्यशाली महसूस कर रही हैं कि उन्हें बाल निकेतन संघ में मुख्य अतिथि के रूप में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

उन्होंने आगे कहा कि यह संघ महान लोगों के सहयोग के कारण काफी मजबूती से खड़ा है। विनोबा भावे जी के आदर्शों पर ये संस्था चल रही है। अच्छे उद्देष्य को लेकर जब कोई संस्था कार्य करती है तो निश्चित रूप से सफल होती है जैसा कि हम देख सकते हैं और यह सब बच्चों के व्यवहार से भी परिलक्षित हो रहा है। अंत में बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने कहा: बच्चों! करो प्रयाण अभय, भावी इतिहास तुम्हारा है; ये नखत अमा के बुझते हैं, सारा आकाश तुम्हारा है।

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बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ नीलिमा अदमने ने बाल निकेतन के बारे में कई ऐसी बातें बताईं जिसे शायद पहले नहीं जानते थे। बाल निकेतन संघ के संस्थापक स्व. पद्मभूषण तात्या साहब सरवटे, दिवंगत पद्मश्री शालिनी ताई और दादा साहब मोरेश्वर मोघे है । यह स्कूल इंदौर के उन स्कूलों में से एक है जो ठोस संस्थापकों के नैतिक मूल्यों पर खड़ा है। यहाँ पर आए आगंतुकों में कई बड़े नाम शामिल है जैसे भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जिन्होंने बाल निकेतन की पहली नीव रखी, भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु, भारत की पहली स्वास्थ मंत्री महारानी अमृत कौर सहित और भी कई जानी मानी हस्तिया यहाँ आई हुई है। विद्यालय के जीवंत मूल्य और समग्र दृष्टिकोण गांधी जी और आचार्य विनोबा भावे के सिद्धांत पर आधारित है।