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Indore: इंडेक्स मेडिकल अस्पताल में 93 वर्षीय संत का मृत्यु उपरांत हुआ देहदान

इंदौर। दान का महत्व हमेशा से वृहद रहा है। हर धर्म में दान का महत्व बताया गया है। माना जाता है कि दान करने से मनुष्य का इस लोक के बाद परलोक में भी कल्याण होता है। इसी धारणा को अमल में लाते हुए 93 वर्ष के श्री संत शिवराम आर्य पिता श्री कनीराम आर्य, 124 महेश नगर तारादेवी सदन पंचकुइयां, इंदौर ने अपनी देहदान का संकल्प लिया था। मृत्यु उपरांत उनके पुत्र श्री राजेंद्र आर्य एवं भाई श्री विजेंद्र आर्य ने मुस्कान ग्रुप के श्री संदीपन आर्य एवं श्री जीतू बगानी से संपर्क किया। इंडेक्स मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के एडिशनल डायरेक्टर आरसी यादव ने इंडेक्स मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के देहदान अधिकारी तुलसीराम जाटव को निर्देशित किया, उन्होंने तत्काल एंबुलेंस में स्वयं जाकर देहदान की प्रक्रिया पूर्ण करवाई। 

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इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन श्री सुरेश सिंह भदौरिया, वाइस-चेयरमैन श्री मयंकराज सिंह भदौरिया, डॉ जी एस पटेल (डीन, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज), श्रीमति चित्रा खिर्वढ़कर (डिप्टी डायरेक्टर) एवं श्री नितिन गोटवाल ने आर्य परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की और आभार व्यक्त किया। प्रोफेसर डॉ विमल मोदी (एनाटॉमी विभाग अध्यक्ष) और पूरे एनाटॉमी विभाग ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

डॉ जी एस पटेल ने कहा कि “देहदान एक महान कार्य है। श्री संत शिवराम जी आर्य के देहदान से इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी बहुत लाभान्वित होंगे। यह माध्यम चिकित्सा जगत में विद्यार्थियों को ज्ञान प्राप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। इस पुनीत कार्य के लिए मैं इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन श्री सुरेश सिंह भदौरिया एवं वाइस-चेयरमैन श्री मयंकराज सिंह भदौरिया जी की ओर से विभाग के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने इस कार्य के लिए आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभाई।”

श्रीमती चित्रा खिर्वढ़कर ने बताया कि “देहदान से निश्चित रूप से चिकित्सा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को मानव शरीर को जानने समझने का ज्ञान प्राप्त होता है। देह एक जरिया है जिसके माध्यम से चिकित्सा जगत में विद्यार्थियों को उचित अध्ययन प्रदान किया जा सके। यह अच्छी बात है कि लोगों में अब जागरूकता बढ़ी है इसीलिए अब पहले की अपेक्षा अधिक संख्या में देहदान किए जा रहे हैं। हम सभी स्वर्गीय श्री संत शिवराम आर्य जी एवं उनके परिवार के प्रति कृतग्य है कि उन्होंने मानवहित के लिए यह कदम उठाया। संपूर्ण चिकित्सा जगत दिवंगत आत्मा का जीवन भर आभारी रहेगा।”

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