एमपी के कॉलेजों में नया हाजिरी नियम, अब कैंपस से ही लगानी होगी अटेंडेंस, सार्थक एप पर इन-आउट जरूरी

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By Raj RathorePublished On: August 31, 2025

मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में अब उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी तरह से बदलने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने सार्थक एप (Sarthak App) को पहले से अधिक प्रभावी बनाकर इसमें नई पारदर्शिता और जवाबदेही जोड़ी है। आयुक्त प्रबल सिपाहा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब किसी भी प्राध्यापक या कर्मचारी को केवल अपने कार्यस्थल से ही हाजिरी दर्ज करनी होगी। इसमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, लाइब्रेरियन, गेस्ट फैकल्टी और जनभागीदारी से जुड़े सभी विद्वान शामिल रहेंगे।


स्थायी लोकेशन से ही दर्ज होगी उपस्थिति

जारी आदेश के मुताबिक, प्रदेशभर के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक (एडी) और कॉलेज प्राचार्य अपनी लोकेशन को स्वयं एप पर मार्क करेंगे। यही उनकी स्थायी लोकेशन होगी और उसी स्थान से सभी अधिकारी-कर्मचारी हाजिरी दर्ज करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया का जिम्मा अब सीधे प्राचार्य और एडी पर होगा। यदि कहीं कोई लापरवाही या गलती पाई जाती है तो संबंधित प्राचार्य और एडी के खिलाफ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से संस्थानों में जवाबदेही की भावना और मजबूत होगी और उपस्थिति को लेकर पारदर्शिता भी आएगी।

कलेक्टर और आयुक्त तक पहुंचेगी रिपोर्ट

नई व्यवस्था में अब सिर्फ ‘आने का समय’ मान्य नहीं होगा, बल्कि कॉलेज से ‘जाने का समय’ दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। प्राचार्य अपने कॉलेज की आईडी से लॉगिन कर पूरे स्टाफ की उपस्थिति का रिकॉर्ड देख पाएंगे। यही डेटा सीधे जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त तक पहुंचाया जाएगा। यहां तक कि यह रिपोर्ट व्हाट्सऐप के माध्यम से भी संबंधित अधिकारियों को भेजी जाएगी। इससे किसी भी तरह की लापरवाही तुरंत उजागर हो जाएगी और उच्च अधिकारियों को रियल-टाइम में जानकारी मिलती रहेगी।

प्राध्यापक संघ का विरोध

हालांकि इस नई व्यवस्था का शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ ने विरोध जताया है। संघ के अध्यक्ष प्रो. आनंद शर्मा का कहना है कि सरकार का उद्देश्य शिक्षकों की उपस्थिति वेरीफाई करना नहीं, बल्कि उन्हें परेशान करना है। उन्होंने तर्क दिया कि अधिकांश कॉलेज बड़े कैंपस में बने होते हैं, जो 20 से 25 एकड़ तक फैले रहते हैं। ऐसे में परीक्षा या प्रैक्टिकल के दौरान शिक्षक सीधे क्लास में चले जाते हैं। कई बार एक ही जगह नेटवर्क की समस्या रहती है, जिससे एप पर उपस्थिति दर्ज करना कठिन हो जाता है। यदि सभी को एक ही स्थान से हाजिरी दर्ज करनी पड़ी तो समय भी बर्बाद होगा और पढ़ाई प्रभावित होगी।

ये होंगे बड़े बदलाव

नई व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सबसे अहम यह है कि हाजिरी केवल कार्यस्थल से ही दर्ज की जाएगी, यानी बाहर से लॉगिन करने की सुविधा खत्म कर दी गई है। इसके अलावा अब लोकेशन रीसेट करने का विकल्प भी समाप्त कर दिया गया है। एक बार मार्क की गई लोकेशन ही स्थायी मानी जाएगी। साथ ही, केवल कॉलेज आने का समय दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कॉलेज छोड़ते समय भी लॉगआउट करना अनिवार्य होगा।

एडी और प्राचार्य की जिम्मेदारी बढ़ी

इस पूरी व्यवस्था का सबसे बड़ा दायित्व क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक और कॉलेज प्राचार्यों पर रहेगा। यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो सीधे इन्हीं पर कार्रवाई होगी। इससे संस्थानों के प्रशासनिक अधिकारियों को और सतर्क रहना होगा तथा वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की निगरानी मजबूती से कर पाएंगे।

सिस्टम की खासियतें

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पूरा सिस्टम अब मोबाइल एप आधारित हो गया है। इसमें एक एनालिटिकल डैशबोर्ड भी उपलब्ध है, जिसके जरिए उपस्थिति का विश्लेषण किया जा सकता है। डेटा रियल-टाइम में अपडेट होकर जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त तक पहुंचेगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे कॉलेजों में कामकाज की पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही तय होगी।