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चीन की चौतरफा घेराबंदी, भारत के समर्थन में US-जापान से लेकर आसियान देश

 

लद्दाख: लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पर गहराया तनाव कई दौरे की बातचीत के बाद भी जैसा का तैसा बना हुआ है। इसी तनाव के बीच शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक लेह पहुंचे थे। इस दौरे ने जवानों में नया जोश भर दिया और अब सैनिकों के हौंसले सातवें आसमान पर है। भारत बातचीत से इस मामले को सुलझाना चाहता है लेकिन चीन की हर चालाकी का जवाब देने के लिए भारत तैयार है।

इससे अलावा भारत चीन पर कूटनीतिक दबाव भी बना रहा है। अतंरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत चीन चौतरफा घिर चुका है। भारत को सिर्फ अमेरिका ही नहीं दुनिया के दर्जनों देशों का समर्थन हासिल है। कई देश है जो सीमा विवाद को लेकर भारत के साथ अहि और चीन को खरी-खोटी सुना चुके है।

अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर चीन पहले से ही है और चीन पर कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लगा चुके है। इसके अलावा अमेरिका ने साफ-साफ शब्दों में कहा है कि LAC पर विवाद के लिए चीन पूरी तरह जिम्मेदार है। बुधवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कायले मैकनेनी ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि भारत-चीन सीमा पर बीजिंग का आक्रामक रवैया चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का असली चेहरा है। इसके अलावा अमेरिका ने भारत की तरफ से चीन के एप को बैन लगाने का भी समर्थन किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भारत के इस कदम का स्वागत किया है।

फ्रांस

चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर भारत को फ्रांस का भी समर्थन मिला है। फ्रांस के रक्षामंत्री ने राजनाथ सिंह को चिट्ठी लिखकर भारतीय जवानों की शहादत पर दुख जताया। फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने लिखा था ‘ये सैनिकों, उनके परिवारों और राष्ट्र के खिलाफ एक कठिन आघात था। इस कठिन हालात में, मैं फ्रांसीसी सेना के साथ अपने समर्थन को व्यक्त करना चाहती हूं। फ्रांस की सेना आपके साथ खड़ी है।’

जापान

जापान ने भी सीमा विवाद पर भारत का समर्थन किया है। जापान ने कहा है कि वो नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदलने वाली किसी भी एकतरफा प्रयास का विरोध करता है। जापान के भारत में राजदूत सतोषी सुजूकी ने भारतीय विदेश सचिव हर्ष श्रींगला से मुलाकात के बाद ट्वीट किया, ‘भारत सरकार के शांतिपूर्व समाधान के प्रयासों की मैं तारीफ करता हूं। जापान आशा करता है कि इस विवाद का शांतिपूर्वक समाधान होगा।’ इतना ही नहीं जापान और चीन के बीच सेनकाकू द्वीप को लेकर भी तनातनी का माहौल है।

ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र में अमरीका और चीन में बढ़ते तनाव के बीच वो अपने सैन्य खर्चों का बजट बढ़ाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा है कि वो अगले 10 साल में सेना का बजट 270 अरब ऑस्ट्रेलियन डॉलर करेंगे। ये 40 फ़ीसदी की बढोत्तरी है।

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