भारत नहीं है G-7 समूह का हिस्सा, फिर भी इस बड़े मंच से पीएम मोदी को इसलिए आया बुलावा

जी 7 समूह सात विकसित देशों का एलीटक्लब है। इस देशों का दुनिया की करीब 40 फीसदी जीडीपी पर कब्जा है। इसी के साथ विश्व अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भागीदार के तौर पर कार्य करते हैं। इन देशों में दुनिया की 10 फीसदी आबादी निवास करती है।

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जी 7 समूह सात विकसित देशों का एलीटक्लब है। इस देशों का दुनिया की करीब 40 फीसदी जीडीपी पर कब्जा है। इसी के साथ विश्व अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भागीदार के तौर पर कार्य करते हैं। इन देशों में दुनिया की 10 फीसदी आबादी निवास करती है। हांलाकि भारत इस वीआईपी समूह का हिस्सा नहीं हैं। लेकिन वैश्विक मंच पर बढ़ रही भारत की ताकत के असर को देखते हुए इस खास सम्मेलन में विशेष तौर पर आमंत्रित किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बैठक में शिरकत करने फ्रांस के बिआरिट्ज शहर पंहुचे हैं।

बता दे कि जी-7 देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल है। साल 1977 से इस सम्मेलन में यूरोपियन यूनियन भी शामिल होता रहा है।

भारत को विशेष न्यौता

विदेश मंत्रालय ने बताया कि जी-7 में भारत को आंमत्रण इस बात का सबूत है कि दुनिया में भारत एक बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप् में उभर रहा है। साथ फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ भारत के प्रधानमंत्री की पर्सनल केमिस्ट्री भी इसका खास कारण है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री वातावरण, जलवायु, समुद्री सुरक्षा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर सेशन को संबोधित करेंगे।

बता दें कि फिलहाल फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जी-7 के अध्यक्ष हैं। ऐसे में उन्हे अधिकार है कि वह गैर सदस्य देशों को इस सम्मेलन में आमंत्रित कर सकते हैं। जी-7 की अध्यक्षता सदस्य देश द्वारा की जाती है। हर सदस्य देश बारी-बारी से जी-7 की अध्यक्षता करता है। गौरतलब है कि पीएम मोदी तीन दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के दौरे पर पंहुचे थे। यहां पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से उनकी केमिस्ट्री मीडिया में काफी चर्चित रही थी।

कश्मीर मसले पर हो सकती है चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीएम मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जम्मू-कश्मीर के मसले पर बात कर सकते हैं। बता दे कि कुछ दिन पहले ट्रंप ने भी कहा था कि वह कश्मीर मसले पर चर्चा करना चाहते हैं। हांलाकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि कश्मीर का मुद्दा भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षी मामला है। इसके अलावा पीएम अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार, टैरिफ पर भी चर्चा कर सकते हैं। साथ ही वे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के साथ भी वार्ता करेंगे।