व्रत और त्यौहार : आज दे रहे हैं महाकाल मंदिर में दर्शन नागचन्द्रेश्वर, वर्ष में केवल नागपंचमी पर खुलते हैं कपाट

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर के शिखर भाग में स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में भक्त लोग आज दर्शन लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इस मंदिर के कपाट वर्ष में केवल 24 घंटों की अवधि के लिए नागपंचमी के दिन ही खुलते हैं, इस दौरान भक्तों की विशेष भीड़ महाकाल मंदिर परिसर में होती है ।

आज नागपंचमी (Nagpanchami) का पावन पर्व है। सत्य सनातन धर्म में मनुष्य सहित संसार के प्रत्येक जीव में ईश्वर का अंश स्वरूप वास माना जाता है। सर्प अथवा नाग अनंत अविनाशी भगवान भोले शंकर का आभूषण है इसलिए नागों को हमारे धर्म में विशेष पूजनीय माना जाता है। इसी आधार पर सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को हमारे देश में नागपंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा और अर्चना का विशेष महत्व है साथ ही आज के दिन नागपूजन की भी विशिष्ट परम्परा है। देशभर के शिवालयों में आज भक्तों की विशेष भीड़ होती है, कई मंदिरों में इस दौरान मेले और दंगल आयोजन की भी प्राचीन परम्परा है।

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आज खुले हैं नागचंद्रेश्वर के कपाट

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर के शिखर भाग में स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में भक्त लोग आज दर्शन लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इस मंदिर के कपाट वर्ष में केवल 24 घंटों की अवधि के लिए नागपंचमी के दिन ही खुलते हैं, इस दौरान भक्तों की विशेष भीड़ महाकाल मंदिर परिसर में होती है । आज नागपंचमी की पूर्व रात्रि बारह बजे से नागचंद्रेश्वर महादेव के कपाट सभी दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए गए हैं जोकि आज रात्रि बारह बजे तक ही खुले रहेंगे। प्रशासन के द्वारा आज भक्तों की विशेष भीड़ को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां और व्यवस्थाएं की गई हैं।

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विश्व में और कहीं नहीं है ऐसी शिव प्रतिमा

मान्यता है कि महाकालेश्वर के शिखर भाग में स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव की जो प्रतिमा है, वैसी अन्य कोई प्रतिमा संसार में उपलब्ध नहीं है। इस विशेष और अद्भुत प्रतिमा में भगवान शिव माता पार्वती के साथ सर्प आसन पर विराज मान हैं साथ ही भगवान कार्तिकेय, प्रथम पूज्य देव गणेश , भगवान शिव के प्रिय गण और वाहन नंदी और साथ ही माता पार्वती के वाहन सिंह की आकृति भी निर्मित हैं। मान्यता है कि की यह विशिष्ट प्रतिमा 11 शताब्दी से पूर्व की है।