वागीश्वरी पुरस्कार 2022 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

वर्ष 1985 में स्थापित यह पुरस्कार मध्यप्रदेश के साहित्यकारों को पिछले तीन कैलेंडर वर्षों में प्रकाशित पुस्तकों पर प्रदान किया जाएगा।

वर्ष 1985 में स्थापित यह पुरस्कार मध्यप्रदेश के साहित्यकारों को पिछले तीन कैलेंडर वर्षों में प्रकाशित पुस्तकों पर प्रदान किया जाएगा। इस तरह वर्ष 2019, 2020 और 2021 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर की अवधि में प्रकाशित पुस्तकें वागीश्वरी पुरस्कार 2022 के लिए प्रस्तुत की जा सकती हैं।

पुरस्कार के लिए पुस्तक प्रस्तुत करने की पात्रता स्वयं लेखक अथवा प्रकाशक को है। इसके अतिरिक्त निर्णायक मंडल के सदस्य, सम्मेलन के वार्षिक अथवा आजीवन सदस्य,सम्मेलन की इकाईयां अथवा अन्य कोई इच्छुक व्यक्ति भी अपनी ओर से किसी लेखक की पुस्तक पुरस्कार के लिए प्रस्तुत कर सकते हैं।

वागीश्वरी पुरस्कार के लिए किसी भी हालत में प्रत्येक श्रेणी में एक से अधिक पुरस्कार नहीं दिए जाएंगे। दो प्रतिभागियों के अंक समान होने पर ऐसी स्थिति में पुनः किसी नए निर्णायक मंडल के सामने दोनों प्रविष्टियां रखी जाएंगी और किसी एक कृति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

पुस्तकें 31 मार्च 2022 तक अनिवार्य रूप से प्राप्त होनी चाहिए। पुरस्कार के लिए पुस्तक की 7 (सात) प्रतियां प्रस्तुत की जाएं। चयनित कृतियों के रचनाकारों को प्रशस्ति पत्र के साथ रु. 5100/- रु. की राशि भेंट की जाती है।

वागीश्वरी पुरस्कारों की नियमावली इस प्रकार है:

1.पुरस्कार हेतु विधाओं के क्षेत्र : 1.कविता 2.गीत-गज़ल, 3.कहानी, 4.उपन्यास, 5.व्यंग्य, 6.कथेतर गद्य विधाएं ( जैसे- नाटक,आलोचना,निबंध,संस्मरण आदि)

2.प्रत्येक पुरस्कार पिछले तीन कैलेंडर वर्षों में प्रकाशित कृति के पहले संस्करण के लिए देय होगा। वर्ष 2018 और 2019 में प्रकाशित जो पुस्तकें पहले भेजी जा चुकी हैं और जिन पर तत्कालीन निर्णायक मंडल अपना निर्णय दे चुके हैं, उन्हें भी वर्ष 2021 के वागीश्वरी पुरस्कार हेतु विचारार्थ रखा जायेगा। प्रतिभागी को ऐसी पुस्तकों की 5 (पांच) प्रतियां दोबारा भेजना होंगी।

3.यह आवश्यक होगा, कि लेखक म.प्र. का मूल निवासी हो या उसका जन्म म.प्र. में हुआ हो या वह गत 10 वर्षों से म.प्र. में निवासरत हो। इस आशय का दस्तावेज यथा जन्म प्रमाणपत्र / दसवीं कक्षा की अंकसूची / आधार कार्ड की सत्यापित छायाप्रति संलग्न करना होगा।

4.पुरस्कार के लिए अनुशंसित लेखक की आयु उस वर्ष-जिसमें पुस्तक प्रकाशित हुई हो, के अंतिम दिन यानि 31 दिसंबर को 50 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए।

5.निर्णायक मंडल का मनोनयन प्रबंधकारिणी समिति द्वारा किया जाएगा।

6.पुरस्कार के लिए विभिन्न विधाओं के लिए गठित निर्णायक मंडल अंक के आधार पर चयन कर अनुशंसाएं देगा।

7.प्रत्येक पुरस्कार के लिए निर्णायक मंडल द्वारा अपनी संस्तुतियां प्रबंधकारिणी समिति को देगी जो कि सामान्यत: स्वीकार्य होंगी।

8.(अ) निर्णायक मंडल में (प्रत्येक विधा हेतु) 3 नाम प्रबंधकारिणी समिति द्वारा तय किए जाएंगे। निर्णायकों के नाम पुरस्कार वितरण के समय ही उजागर किए जाएंगे।

8(ब) वागीश्वरी पुरस्कार हेतु किसी एक विधा में प्रविष्टि के तौर पर एक ही पुस्तक आने पर उसे निर्णायकों को न भेजकर आगामी वर्ष की प्रविष्टि में शामिल कर लिया जाएगा। ऐसा समान परिस्थितियां होने पर आगामी दो कैलेंडर वर्ष तक किया जाएगा।

9.पूर्व में किसी भी विधा में वागीश्वरी पुरस्कार प्राप्त कर चुके लेखक के नाम पर दोबारा पुरस्कार के लिए विचार नहीं होगा।

10.वागीश्वरी पुरस्कार के लिए म.प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन की प्रबंधकारिणी समिति के सदस्य पात्र नहीं होंगे।

11.पुरस्कार के लिए प्रविष्टियां लेखकों, संस्थाओं, समाचार पत्र-पत्रिकाओं, सोशल मीडिया के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी।

12. विनिर्दिष्ट वर्ष के लिए यदि निर्णायक मंडल को लगता है, कि किसी विधा में पुरस्कार के लिए कोई कृति योग्य नहीं है, तो उस वर्ष उस विधा विशेष में पुरस्कार नहीं दिया जाएगा ।

13.किसी भी प्रकार की सिफारिश और प्रतिभागी लेखक द्वारा निर्णायकों से संपर्क किया जाना कदाचार माना जाएगा। ऐसी कोई जानकारी मिलने पर सम्बंधित कृति/प्रविष्टि पुरस्कार के अयोग्य मान ली जाएगी। सम्मेलन अथवा उसके किसी भी पुरस्कार को लेकर की गई अमर्यादित टिप्पणी अथवा किसी पदाधिकारी पर व्यक्तिगत, अनर्गल आरोप लगाने वाले लेखक अथवा उसे प्रसारित करने वाले किसी भी लेखक की कोई भी प्रविष्टि पुरस्कार के लिए स्वतः ही अयोग्य मानी जायेगी।

14.वागीश्वरी पुरस्कार विजेता रचनाकारों द्वारा भविष्य में प्रकाशित होने वाली उनकी पुस्तकें यदि सम्मेलन पुस्तकालय में प्रदाय की जाएंगी तो उसका स्वागत किया जाएगा। इससे अध्ययन/ शोध करने वालों का भी सहयोग होगा।

15 .विजेताओं से यह भी अपेक्षा है कि वे इस उपलब्धि का उल्लेख अपनी आगामी पुस्तकों में, और अन्यत्र प्रकाशित होने वाली रचनाओं के साथ परिचय में अवश्य करें, जिससे सम्मेलन की गौरवशाली परंपरा से उनका जुड़ाव परिलक्षित हो सके।

16.वागीश्वरी पुरस्कार के संबंध में म.प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन की प्रबंधकारिणी समिति का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा। इस संबंध में सम्मेलन से किसी भी प्रकार का संवाद,वाद-विवाद या पत्राचार नहीं किया जा सकेगा।

17.प्रत्येक प्रतिभागी लेखक को अपनी प्रविष्टि के साथ सादे कागज़ पर यह हस्ताक्षरित वचन देना होगा कि उसने वागीश्वरी पुरस्कार 2021 की नियामवली का भलिभांति अध्ययन कर लिया है और वह इसके प्रत्येक बिंदु से सहमत है।

प्रविष्टियां भेजने का पता:
साहित्य मंत्री
म.प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन
मायाराम सुरजन स्मृति भवन
पी एण्ड टी चौराहा
शास्त्री नगर, भोपाल- 462003