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दीपावली: स्वच्छ मानस मिशन

Posted on: 04 Nov 2018 20:27 by Deepak Meena
दीपावली: स्वच्छ मानस मिशन

शोभा जैन

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मन के अंधेरे में जीत का पर्व ‘दीपावली’ अनादिकाल से परंपरागत उत्साह के साथ मनाया जाता आया है| पांच दिवसीय सकारात्मकता से सराबोर यह महोत्सव पौराणिक कथानुसार आरोग्य के देवता के साथ धनतेरस से प्रारंभ होकर ‘रूप की साधना’ लिए भाई दूज तक विशेष माना जाता है

यह पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत है इसके विशेष महत्व के चलते हम सभी इसकी पूर्ववत तैयारियां करते हैं अपने घरों और व्यावसायिक संस्थाओं की साफ़ -सफाई और सजावट करते हैं किन्तु अपने ‘मन’ की स्वच्छता और सजावट के ख्याल से सर्वथा अनभिज्ञ ही रहते हैं |बदलते सामाजिक परिवेश में पर्वों को सार्थकता प्रदान करना वर्तमान सन्दर्भ में नितांत आवश्यक हो गया है हम पर्वों को लेकर साधनों पर अधिक गंभीर दिखाई देते है जबकि पर्वो का जुड़ाव ‘मानस’ से होना उसकी सार्थकता है उससे हमारी भावनायें और मर्म जुड़े होते है |जिस प्रकार हम सभी ने ‘स्वच्छ भारत मिशन’ को सार्थकता दी है उसी तरह ‘स्वच्छ मानस मिशन’ के विचार को इस वृहद त्यौहार पर दीप प्रज्वलन के साथ संल्कल्पित कर एक अनूठी पहल क्यों न करें|परम्पराओं को रूढ़िवादिता न बनाते हुए एक नई परम्परा को अपने जीवन में स्थान दें| अपने आसपास भी ‘स्वच्छ मानस’ का वातावरण निर्मित करेंगे तो बहुत कुछ ऐसा होने से बचाया जा सकता है जिसने आज मानवीयता पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े कर दिये है|दरअसल में विकृत मानसिकता ने हमारे मन को पुर्णतः अ,स्वच्छ कर दिया है | शुष्क और नीरस जीवन का बोझ, एकाकीपन और आत्मकेंद्रित समय में मनुष्य की अभाव ग्रस्त परिस्थितियों ने निः संदेह मानव के ‘मानस’ में एक ठह-राव सा पैदा कर दिया है और ठहरा हुआ जल कभी शुद्ध नहीं होता | मन की उदासीनता ने त्योहारों को केवल खर्च करने का एक नियत दिन बना कर रख दिया है शायद इसलिए अब ये महज औपचारिकता से ही प्रतीत होते हैं |

हमें याद रखना चाहिए हर त्यौहार एक गतिशीलता भरा सकारात्मक सन्देश लेकर आता हैं इस दीपावली हम सन्देश के रूप में क्या अर्जित कर रहे है समसामयिक समय को देखते हुए एक बार इस पर पुनरावलोकन कर लिया जाय तो हमारे आसपास बहुत कुछ स्वतः ही संतुलित हो जायेगा | उन्नत-विचारशील, सकारात्मक-रचनात्मक एवं सेवा संपन्न भाव अगर इस नियत दिन का हिस्सा बने तो ‘स्वच्छ भारत’ के साथ ‘स्वच्छ मानस मिशन’ के परिणाम भी अविलम्ब सामने आयेंगे और दीपोत्सव में ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ सूक्ति भी सार्थक होगी |

shobha jain

वरिष्ठ लेखिका,समीक्षक

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