इंदौर के प्रसिद्ध शाहरा व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखने वाले लेखक, समाजसेवी और प्रमुख एग्रो-इंडस्ट्रियलिस्ट श्री दिनेश शाहरा को कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह मानद डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि श्री शाहरा को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों और धर्मार्थ योगदानों के लिए प्रदान की गई है।

शाहरा ने बताया, “मेरा कानपुर से गहरा नाता है, जहाँ मैंने मातृ संस्था हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) से अपनी कैमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। आज जब वही शहर मुझे एक प्रतिष्ठित पीएचडी सम्मान प्रदान कर रहा है, तो ऐसा लगता है, जैसे समय ठहर-सा गया है। मैं छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित और मान्यता प्राप्त संस्था से मानद डॉक्टरेट की उपाधि पाकर वास्तव में सम्मानित और प्रसन्न महसूस कर रहा हूँ । यह मान्यता मुझे अपने साहित्यिक और धर्मार्थ प्रयासों पर और भी अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरणा देती है। मेरे जीवन का मिशन आम लोगों, खास तौर पर युवाओं के लाभ के लिए हमारे सदियों पुराने और समय-सिद्ध सनातन दर्शन की अद्भुत अंतर्दृष्टि को स्पष्ट करना है।”

दस वर्षों से अधिक समय से, दिनेश शाहरा फाउंडेशन (डीएसएफ) इंजीनियरिंग के छात्रों के लाभ के लिए, प्रति वर्ष एचबीटीयू-कानपुर में दिनेश शाहरा प्रबंधन व्याख्यान का आयोजन करता है। इसके अलावा, फाउंडेशन नियमित तौर पर एचबीटीयू में ग्रीन गोल्ड डे समारोह का आयोजन करता है, जिसके दौरान कई पौधे लगाए जाते हैं। डीएसएफ की ग्रीन गोल्ड डे पहल का उद्देश्य वृक्ष संरक्षण की सख्त आवश्यकता और हरित क्षेत्र में गिरावट के कारण पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों की तरफ ध्यान आकर्षित करना है। इसलिए इस दिन, पूरे देश में डीएसएफ के वॉलंटियर्स पौधरोपण करते हैं।

दिनेश शाहरा उन दुर्लभ इंडस्ट्रियलिस्ट्स में से एक हैं, जिन्होंने भारतीय कृषि उद्योग में अमिट छाप छोड़ी है। श्री शाहरा ने “पीली क्रांति” का नेतृत्व करके मध्य प्रदेश को “भारत का सोया बाउल” यानी ‘सोयाबीन का कटोरा’ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने लाखों भारतीयों को पौष्टिक भोजन तक पहुँच प्रदान की। आत्मनिर्भरता, दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा और कृषि-सुधारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने लाखों भारतीयों की आजीविका और स्वस्थ भोजन तक उनकी पहुँच में सुधार किया है। आत्मनिर्भरता, रणनीतिक खाद्य सुरक्षा और कृषि-सुधारों के लिए उनके नजरिए से लाखों हितधारकों, विशेष रूप से किसानों ने अपने जीवन स्तर को बेहतर बनाया है।

एक स्मार्ट व्यवसायी होने के अलावा, वे अपने धर्मार्थ संगठन, डीएसएफ के जरिए अपना योदगान देते हुए, एक प्रसिद्ध समाजसेवी के रूप में भी अहम् भूमिका निभा रहे हैं। डीएसएफ आपदा राहत, शिक्षा, आध्यात्मिकता और स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) के क्षेत्रों में कई मानवीय मुद्दों का समर्थन करता है। इसका उद्देश्य सनातन या भारतीय लोकाचार के मूल्यों के आधार पर एक सामाजिक संरचना स्थापित करना है। फाउंडेशन की स्थापना “समाज के भौतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए जिम्मेदार संस्थाओं के योगदान को देखते हुए उन्हें वापस सहयोग करने” के लिए की गई थी। डीएसएफ में योगदान देने वाले प्राथमिक कारकों में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य सहित आध्यात्मिकता, स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) और शिक्षा शामिल हैं। द इकोनॉमिक टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) ने वर्ष 2020 में डीएसएफ को “शिक्षा, आध्यात्मिकता और पर्यावरण में उत्कृष्ट परोपकारी योगदान” के लिए मान्यता प्रदान की है।

दिनेश शाहरा ने सनातन ज्ञान और अपने आध्यात्मिक गुरुओं की शिक्षाओं पर कई किताबें भी लिखी हैं, जैसे ‘सिम्प्लिसिटी एंड विज़डम’, ‘सनातन लीला और सनातन उत्सव- हैप्पीनेस ऑफ माई बर्थ राइट’। द टाइम्स ग्रुप द्वारा हाल ही में कानपुर में एचबीटीयू में श्री शाहरा के प्रेरक जीवन के बारे में “द लेजेंड एंड हिज़ लिगेसी” नामक एक किताब लॉन्च की गई है।