नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक (central cabinet meeting) हुई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए है। मोदी सरकार के कैबिनेट ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस बात कि जानकारी साझा कि है। अनुराग ठाकुर ने बताया कि भारत ग्रीन हाइड्रोजन का ग्लोबल हब बनेगा। प्रतिवर्ष 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन होगा।

देश ग्रीन हाइड्रोजन का हब बनेगा, यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने साल 2021 में कही थी, आज इसे कैबिनेट ने मंजूरी दी है। अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट मीटिंग में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का लक्ष्य रखा है। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए 19,744 करोड़ रुपए की मंजूरी की गई है।

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जानकारी के लिए आपको बता दे कि PM मोदी ने 15 अगस्त 2021 को स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण के दौरान नेशनल हाइड्रोजन मिशन का ऐलान किया था। बुधवार को इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट में मंजूरी दी गई है। अनुराग ठाकुर ने बताया कि 60-100 गीगावाट की इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता को तैयार किया जाएगा। इलेक्ट्रोलाइजर की मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर 17,490 करोड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। ग्रीन हाइड्रोजन के हब को विकसित करने के लिए 400 करोड़ का प्रावधान किया है।

अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने आगे बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादक और उपभोक्ता को एक ही जगह पर लाया जाएगा। ताकि ट्रांसपोर्टशन भी न बढ़े और जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर भी एक जगह उपलब्ध कराया जा सके। 2047 तक देश को एनर्जी इंडिपेंडेंट बनाने का लक्ष्य हम प्राप्त करे इसके लिए ये बहुत जरूरी कदम है।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि क्लाइमेट चेंज के क्षेत्र में भारत दुनिया मे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 2030 तक इसमें 6 लाख नौकरियां इससे मिलेंगी। इसमें 8 लाख करोड़ का इन्वेस्टमेंट होगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि 382 मेगावाट के सुन्नी बांध हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश के लिए मंजूर किया गया है। इसमें 2,614 करोड़ रुपए की लागत आएगी। ये सतलुज नदी पर बनेगा। यह पांच साल तीन महीने में पूरा होगा। इससे हिमाचल में हजारों की जॉब क्रिएट होंगे। इससे हिमाचल को 13% बिजली मुफ्त में मिलेगी।