Breaking News

ये है चमकी बुखार के लक्षण, ऐसे बचाएं मासूमों की जान

Posted on: 22 Jun 2019 11:53 by Ayushi Jain
ये है चमकी बुखार के लक्षण, ऐसे बचाएं मासूमों की जान

बिहार : बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार के चपेट में आने से कई बच्चे अपनी जान गंवा चुके है। इस बुखार की वजह से मौत का अकड़ा 100 के पार हो चूका है। एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम’ यानी ‘चमकी बुखार’ दरअसल एक तरह का मस्तिष्क ज्वर होता है।

बिहार में चमकी नाम के बुखार की चपेट में आने से कई बच्चे अपनी जान गंवा चुके है। इस बुखार से बच्चों का इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होने की वजह से करीब 1 से 8 साल के बीच की उम्र के बच्चे इस बीमारी की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में चमकी बुखार से 110 लोगों की मौत हो गई है। इतना ही नहीं लगभग 500 बच्चे अभी भी जिंदगी-मौत की जंग लड़ रहे हैं।

क्या है ‘चमकी’ बुखार-

गर्मियों में तेज धूप और पसीना बहने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इस वजह से डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, थकान, लकवा, मिर्गी, भूख में कमी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। चमकी बुखार के लक्षण भी ऐसे ही हैं। यह बीमारी शरीर के मुख्य नर्वस सिस्टम या तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। बहुत ज्यादा गर्मी और नमी के मौसम में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के फैलने की रफ्तार बढ़ जाती है। इस मौसम में इसकी तीव्रता भी काफी बढ़ जाती है।
ये एक संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी के वायरस शरीर में पहुंचते ही खून में शामिल होकर अपना काम शुरू कर देते हैं। शरीर में इस वायरस की संख्या बढ़ने पर यह खून के साथ मिलकर व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। मस्तिष्क में पहुंचने पर ये वायरस नसों में सूजन पैदा कर देते हैं। जिसकी वजह से शरीर का ‘सेंट्रल नर्वस सिस्टम’ खराब हो जाता है।

चमकी बुखार के लक्षण-
चमकी बुखार में बच्चों को लगातार तेज बुखार रहता है। बदन में ऐंठन आना शुरू हो जाती है। कमजोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है। यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है और उसे झटके लगते रहते हैं।

बुखार आने पर क्या करें-
बच्चे को तेज बुखार आने पर उसके शरीर को गीले कपड़े से पोछते रहें। ऐसा करने से बुखार सिर पर नहीं चढ़ेगा। पेरासिटामोल की गोली या सिरप डॉक्टर की सलाह पर ही रोगी को दें। बच्चे को साफ बर्तन में एक लीटर पानी डालकर ORS का घोल बनाकर दें। याद रखें इस घोल का इस्तेमाल 24 घंटे बाद न करें। बुखार आने पर रोगी बच्चे को दाएं या बाएं तरफ लेटाकर अस्पताल ले जाएं। बच्चे को बेहोशी की हालत में छायादार स्तान पर लेटाकर रखें। बुखार आने पर बच्चे के शरीर से कपड़े उतारकर उसे हल्के कपड़े पहनाएं। उसकी गर्दन सीधी रखें।

बुखार आने पर क्या न करें-
बच्चे को खाली पेट लीची न खिलाएं। आधी पक्की हुई या कच्ची लीची का सेवन करने से बचें। बच्चे को कंबल या गर्म कपड़े न पहनाएं। बेहोशी की हालत में बच्चे के मुंह में कुछ न डालें। मरीज के बिस्तर पर न बैठें और न ही उसे बेवजह तंग करें। मरीज के पास बैठकर शोर न मचाएं।

सावधानी-
गर्मी के मौसम में फल और खाना जल्दी खराब होता है, ऐसे में उनका सेवन जल्दी कर लें, ज्यादा देर तक ना रखें। घरवाले इस बात का खास ख्याल रखें कि बच्चे किसी भी हाल में जूठे और सड़े हुए फल नहीं खाए। बच्चों को गंदगी से बिल्कुल दूर रखें। खाने से पहले और खाने के बाद हाथ जरूर धुलवाएं। साफ पानी पिएं, बच्चों के नाखून नहीं बढ़ने दें। बच्चों को गर्मियों के मौसम में धूप में खेलने से भी मना करें। रात में कुछ खाने के बाद ही बच्चे को सोने के लिए भेजें। डॉक्टरों की मानें तो इस बुखार की मुख्य वजह सिर्फ लीची ही नहीं बल्कि गर्मी और उमस भी है।

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com