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मुग़ल बादशाहों के हरम की इन रंगीन कहानियों को पढ़कर आप रह जाएंगे दंग

Posted on: 11 Jan 2019 18:15 by Surbhi Bhawsar
मुग़ल बादशाहों के हरम की इन रंगीन कहानियों को पढ़कर आप रह जाएंगे दंग

डॉ. बालकृष्ण पंजाबी

मध्यकालीन भारत में ‘हरम’ शब्द का संबंध मुस्लिम बादशाहों के राजमहलों में महिलाओं की स्थिति से है। ‘अंत:पुर’ एवं जनानखाना शब्द भी हरम के पर्यायवाची हैं। हरम या जनानखाना की जिंदगी मध्यकालीन भारतीय समाज, विशेष रूप से मुस्लिम राजपरिवारों के सामाजिक -राजनीतिक जीवन के अनेक महत्वपूर्ण पक्षों को समझने में हमारी मददगार है।

यह उल्लेखनीय है कि इस काल में हरम शब्द में बादशाहों की पत्नियां, रखैलें, मां, बहनें, बेटियां, स्त्रीदास, हिजड़े स्त्री निवासों की देखरेख का कार्य सौंपा जाता था, सम्मिलित हैं। हरम की महिलाएं आम लोगों से अलग और परदे में रहती थीं। ‘हिंदुस्तान के निवासियों का जीवन और उनकी परिस्थितियां’ नामक प्रसिद्ध पुस्तक के ख्यात लेखक के.एम. अशरफ ने विस्तृत विश्लेषण के बाद लिखा है कि प्राचीन काल में स्त्रियों को थोड़ा बहुत अलग रखा जाता था और वे घूंघट का पालन करती थीं, किंतु परदे का वर्तमान विस्तृत और संस्थागत रूप मुस्लिम शासन के समय से ही प्रारंभ होता है।

मुगलकाल के पूर्व सल्तनत काल में हरम संबंधी परंपराओं और व्यवस्थाओं की कुछ रोचक जानकारियां मिलती हैं। बड़े-बड़े अमीरों और अधिकारियों के लिए भी यह वर्जित क्षेत्र था। हरम की औरतों को आम तौर पर एक से दूसरे स्थान पर आवरण युक्त डोलियों में ले जाने की प्रथा थी। दास लड़कियों को ताला लगे वाहनों में भी भेजे जाने के उदाहरण मिलते हैं। दिल्ली और मांडू के सुल्तानों के हरम में बड़ी संख्या में स्त्रियों के होने के उल्लेख उपलब्ध हैं, लेकिन सल्तनत काल में हरम की आंतरिक व्यवस्था उतनी स्पष्ट नहीं है, जैसी कि मुगल सम्राट अकबर के जमाने में हो गई थी। इसके अतिरिक्त सल्तनत काल की राजनीति में हरम की भूमिका अपवादस्वरूप ही देखने को मिलती है। मुगल बादशाहों के राजमहलों का काफी बड़ा हिस्सा शाही स्त्रियों के रहन-सहन अर्थात हरम के लिए सुरक्षित रहता था। इस काल में सम्राट के महिला अपार्टमेंट को महल कहा जाता था।

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