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चुनाव की जंग में Social Media बनेगा बड़ा हथियार? जानें राजनीतिक दलों की तैयारी

नई दिल्ली। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सभी पार्टियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं और सोशल मीडिया पर नेताओं की बयानबाजी तेजी से सामने आ रही है। सोशल मीडिया पर जहां नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं, वहीं उनके बयान भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि आगामी चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका भी अहम होने वाली है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर भी सभी पार्टियों की तैयारियां तेज हैं। इसी बीच भाजपा की तरफ से खबर आ रही है कि सोशल मीडिया के जरिये पार्टी एक I बड़ा मोर्चा खोलने जा रही है। इसके लिए भाजपा के करीब 50 हजार कार्यकर्ताओं की बड़ी आर्मी तैयार की जा रही है और तीन-तीन जिलों के कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी जा रही है। बता दें, इन सभी को भाजपा का दुष्प्रचार रोकने की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। अब भाजपा की उम्मीदें हैं कि इससे आने वाले चुनाव में भाजपा को फायदा मिलने वाला है।

चुनाव की जंग में सोशल मीडिया बनेगा बड़ा हथियार?
बताया जा रहा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भी सोशल मीडिया (Social Media) का बड़ा रोल होने वाला है। भाजपा ने इस हथियार को अच्छी तरह से समझ लिया है और इस्तेमाल करना भी जानती है। ऐसे में भाजपा प्राइवेट एजेंसी की मदद से सोशल मीडिया मैनेजमेंट को बल दे रही है। इसी के साथ पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं को भी काम पर लगाया जा रहा है। अब सोशल मीडिया सेल को यह जिम्मा दिया गया है कि चुने गए पार्टी वर्कर्स को स्पेशल आईटी ट्रेनिंग देकर उन्हें तैयार किया जाए। इसी प्रकार सपा, बसपा, कांग्रेस व अन्य दल भी सोशल मीडिया पर पीछे नहीं हैं। इन दलों के कार्यकर्ता भी भाजपा को घेरने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं।
एक बार में दी जा रही 1000 कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग

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बता दें कि भाजपा में ट्रेनिंग के दौरान कार्यकर्ताओं को माइक्रो-ब्लागिंग ऐप Koo, फेसबुक, व्हॉट्सऐप और बाकी सोशल मीडिया अकाउंट के इस्तेमाल के बारे में सिखाया जाएगा। इसके लिए मंडल स्तर पर कार्यशालाएं जारी हैं। वर्कशॉप में 3-3 जिलों के कार्यकर्ताओं को बुलाया जा रहा है। एक बार में करीब 1000 कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी जा रही है।

तेजी से बढ़ रहे इंटरनेट यूजर्स
एक नई रिपोर्ट के मुताबिक अगले चार साल बाद यानी 2025 तक कुल सक्रिय इंटरनेट आबादी के 90 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। पिछले साल इनकी संख्या 62.2 करोड़ थी। शहरी भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। साल 2020 में ये आंकड़ा 32.3 करोड़ यूजर्स (शहरी आबादी का 67 प्रतिशत) तक पहुंच गया। ग्रामीण भारत में डिजिटल अपनाने की प्रक्रिया तेजी से जारी है। ये आंकड़े द इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) की ओर से जारी रिपोर्ट में सामने आए हैं।

सोशल मीडिया की एजेंडा सेटिंग इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में Koo App, फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर तेजी से यूजर आ रहे हैं। कई लोगों के लिए यह सूचना का पहला स्रोत बन चुका है। एक बात तय है कि सोशल मीडिया का सीधा असर मुख्य धारा के मीडिया पर पड़ रहा है। कई बार इसका प्रभाव इतना अधिक हो जाता है कि यह सामाजिक परिवर्तन का वाहक बन जाता है।

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