18, 56 ,57 तक नमाज पढ़ने के सबूत को सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नकारा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जो महत्वपूर्ण बात कही है। वह यह है कि 18, 56, 57 तक नमाज पढ़ने के कोई सबूत नहीं मिले हैं।

0
65
supreme-court

इंदौर : सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जो महत्वपूर्ण बात कही है। वह यह है कि 18, 56, 57 तक नमाज पढ़ने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। उल्लेखनीय है कि मुस्लिम पक्ष द्वारा यह कहा गया था कि 1528 में मस्जिद निर्माण के बाद से मुसलमान वहां नमाज करते चले आ रहे हैं। इसलिए उस जगह पर मुसलमानों का हक बनता है।

लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि 18 से 56 तक हिंदू भी यहां पर पूजा करते रहे हैं। जब उन्हें रोका गया तो वे बाहर चबूतरे पर पूजा करने लगे इधर अंग्रेजों को लेकर भी यह कहा गया है। कि अंग्रेजों ने दोनों को अलग रखने के लिए रेलिंग लगा दी थी। कोर्ट का यह भी कहना है कि यात्रियों के वृतांत और पुरातात्विक सबूतों से भी मंदिर की पुष्टि होती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here