आज भी यहां रास रचाने आते है राधा-कृष्ण, रहस्यमयी है ये जगह

धार्मिक नगरी वृन्दावन में निधिवन एक अत्यन्त पवित्र, रहस्यमयी धार्मिक स्थान है। मान्यता है कि निधिवन में भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा आज भी अर्द्धरात्रि के बाद रास रचाते हैं।

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नई दिल्ली: आज देशभर में जन्माष्टमी का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का माहौल श्रद्धालुओं के सिर चढ़कर बोल रहा है। श्रीकृष्ण जन्मोत्वस के मौके पर मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। आज इस मौके पर हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे है जहां राधा-कृष्ण आज भी रास रचाने आते है।

भारत में कई ऐसी जगह है जो अपने दामन में कई रहस्यों को समेटे हुए है। धार्मिक नगरी वृन्दावन में निधिवन एक अत्यन्त पवित्र, रहस्यमयी धार्मिक स्थान है। मान्यता है कि निधिवन में भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा आज भी अर्द्धरात्रि के बाद रास रचाते हैं। रास के बाद निधिवन परिसर में स्थापित रंग महल में शयन करते हैं। जिस वृंदावन में कान्हा का बचपन बीता वहीं आज भी श्री कृष्ण हर रात आते हैं। जन्माष्टमी के मौके पर जानिए वृंदावन के ऐसे रहस्य के बारे में, जिसके बारे में आपने शायद ही सुना होगा।

मान्यता है कि वृंदावन में स्थित निधिवन में आज भी हर रात कृष्ण, गोपियों संग रासलीला करते हैं। इसलिए सुबह से दर्शन के लिए खुला रहने वाला निधि वन शाम को बंद हो जाता है। शाम के समय यहां किसी को रुकने नहीं दिया जाता। यहां कान्हा आज भी रास रचाते हैं, कई लोगों ने इसका अनुभव लिया है।

पशु-पक्षी शाम होते ही निधिवन छोड़ देते है

स्थानीय लोगों और पंडितों का कहना है कि जिसने भी यह रासलीला देखने के की कोशिश की वह या तो वह पागल हो गया या फि‍र उसकी मौत हो गई। इतना ही नहीं निधिवन में दिन में रहने वाले पशु-पक्षी भी शाम होते ही निधिवन को छोड़कर चले जाते हैं।

पेड़ बढ़ते है जमीन की ओर

निधिवन में लगे पेड़ों की डालें ऊपर की तरफ बढ़ने की बजाए जमीन की ओर बढ़ती हैं। फिलहाल यहां रास्ता बनाने के लिए पेड़ों को डंडे के सहारे रोका गया है।

जब राधा संग कृष्ण रास रचाते हैं

निधिवन में मौजूद जो तुलसी के पेड़ है वो गोपियां बनती हैं. यहां तुलसी का हर पेड़ जोड़े में है। इसके पीछे यह मान्यता है कि जब राधा संग कृष्ण वन में रास रचाते हैं तब यही जोड़ेदार पेड़ गोपियां बन जाती हैं। जैसे ही सुबह होती है तो सब फिर तुलसी के पेड़ में बदल जाती हैं।

वन के आसपास बने मकानों में नहीं हैं खिड़कियां

वन के आसपास बने मकानों में खिड़कियां नहीं हैं। यहां के निवासी बताते हैं कि शाम सात बजे के बाद कोई इस वन की तरफ नहीं देखता। जिन लोगों ने देखने का प्रयास किया या तो अंधे हो गए या फिर उनके ऊपर दैवी आपदा आ गई। जिन मकानों में खिड़कियां हैं भी, उनके घर के लोग शाम सात बजे मंदिर की आरती का घंटा बजते ही बंद कर लेते हैं। कुछ लोग तो अपनी खिड़कियों को ईंटों से बंद भी करा दिया है।

श्रीकृष्‍ण यहां आकर बांसुरी बजाते हैं

हर शाम निधिवन के रंग महल में पुजारी द्वारा राधा-कृष्ण के विश्राम के लिए चंदन के पलंग को सजाया जाता है और पास में ही दो दतून, एक लोटा पवित्र जल, श्रृंगार की सामग्री और पान रख दिया जाता है। अगले दिन सुबह जब देखा जाता है, तो बिस्‍तर अस्‍त-व्‍यस्‍त, दातुन उपयोग की हुई व जलपात्र खाली मिलता है। श्रीकृष्‍ण यहांआकर बांसुरी बजाते हैं, जिसकी मधुर व दिव्‍य ध्‍वनि कई व्‍यक्तियों के द्वारा सुनी गई है।

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