कल है मंगला गौरी व्रत, विधिवत पूजन से ही मिलता है विशेष फल

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सावन का महीना वैसे तो शिव को समर्पित है लेकिन इस महीने में शिव के साथ मां पार्वती की पूजा करने से भी विशेष फल की प्राप्ति होती हैं। मां पार्वती का एक नाम गौरी भी हैं। और सावन में आने वाले मंगलवार को मंगला गौरी व्रत की मान्यता हैं। पुराणों के अनुसार इस व्रत को करने से ना सिर्फ मनचाहे वर की प्राप्ति होती हैं बल्कि संतान सुख भी प्राप्त होता हैं।

सावन में आने वाले हर मंगलवार को मंगलागौरी का स्मरण कर इस व्रत को सच्ची श्रद्धा से करना तो फलदायी होता ही हैं साथ ही इस व्रत की कथा को सुनने से भी कई फायदे होते हैं। इस व्रत की पूजा विधिवत की जानी चाहिए। आज हम आपको इस व्रत की विधि के बारे में बता रहे हैं।

इस विधि से करें मंगला गौरी व्रत की पूजा

1- किसी भी व्रत की शुरुआत हमेशा व्रत के संकल्प से करनी चाहिए। इसके लिए मंगलवार की सुबह, स्नान आदि से निर्वत होने के बाद, मंगला गौरी की मूर्ति या फोटो को लाल रंग के कपडे से लपेट कर, लकडी की चौकी पर रखा जाता है।

2- एक चौकी पर सफेद लाल कपड़ा बिछाना चाहिए। सफेद कपड़े पर चावल से नौ ग्रह बनाने है, तथा लाल कपडे पर षोडश माताएं गेंहूं से बनाए। चौकी के एक तरफ चावल और फूल रखकर गणेश जी की स्थापना करें। वहीं चौक के दूसरी और गेंहु रख कर उस पर कलश रखें। आटे से चौमुखी दीपक बनाकर कपड़े से बनी 16-16 तार कि चार बातियां जलाई जाती हैं।

3- किसी भी पूजा के शुरु में श्री गणेश जी का पूजन करना चाहिए। पूजन में श्री गणेश पर जल, रोली, मौली, चन्दन, सिन्दूर, सुपारी, लोंग, पान, चावल, फूल, इलायची, बेलपत्र, फल, मेवा और दक्षिणा चढ़ाते हैं। इसके बाद कलश का पूजन भी श्री गणेश जी की पूजा के समान ही किया जाता है। फिर नौ ग्रहों तथा सोलह माताओं की पूजा करें। चढ़ाई गई सभी सामग्री ब्राह्माण को दें।

4- मंगला गौरी की प्रतिमा को जल, दूध, दही से स्नान करा, वस्त्र आदि पहनाकर रोली, चन्दन, सिन्दुर, मेंहन्दी व काजल लगाए। श्रंगार की सोलह वस्तुओं से माता को सजाए। इसके बाद सोलह प्रकार के फूल- पत्ते माला चढ़ाए। फिर मेवे, सुपारी, लौग, मेंहदी, शीशा, कंघी व चूडियां चढ़ाए।

5- पूजन के बाद अंत में मंगला गौरी व्रत की कथा जरुर सुने कथा सुनने के बाद विवाहित महिला अपनी सास तथा ननद को सोलह लड्डु दें। इसके बाद वे यही प्रसाद ब्राह्मण को भी दें। अंतिम व्रत के दूसरे दिन बुधवार को देवी मंगला गौरी की प्रतिमा को नदी या पोखर में विर्सिजित कर दें।

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