गांधी पर उठाये जा रहे सवालों का जवाब देगी यह किताब

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इंदौर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आजादी के 15 दिन पहले कश्मीर की यात्रा कर पाकिस्तान में उसके मिल जाने की आशंका को खत्म कर दिया था। गांधी की इस यात्रा में मुसलमानों ने उन्हें जिंदा पीर कहा था और कश्मीरी जनता पर उनके प्रभाव से ही कश्मीर का भारत में विलय पक्का हुआ था। ऐसी दिलचस्प जानकारियों और कई गंभीर विषयों पर गांधी के विचारों को सामने लाती एक किताब “गांधी है तो भारत है” जल्द ही लोगों के हाथों में आने वाली है।

दरअसल मध्यप्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में गांधी संवाद के जरिये राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों को प्रत्येक विद्यार्थी तक ले जाने के अभियान में जुटे व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ के राज्य समन्वयक डॉ.ब्रह्मदीप अलूने की किताब “गांधी है तो भारत है” का 25 जनवरी को भोपाल में लोकार्पण किया जा रहा है। यह कार्यक्रम गाँधी भवन, पोलिटेक्निक चौराहा, भोपाल में सुबह 11 बजे आयोजित किया जाएगा । इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह होंगे । इसके अलावा कांग्रेस मंत्री जीतू पटवारी, पी. सी. शर्मा और विजय दत्त श्रीधर भी विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे । किताब में ऐसे विषयों को प्रमुखता से शामिल किया गया है,जिसे हथियार बनाकर गलत जानकारियां समाज के सामने प्रचारित की जा रही है या भ्रम फैलाने का प्रयास किया जाता है।

लेखक का कहना है कि गांधी को जब भी कटघरे में खड़ा किया गया है तो गांधी के तरीकों,गांधी की नीतियों और गांधी के विचारों से ही जवाब भी मिले हैं। गांधी से जुड़े 31 विभिन्न विषयों पर लिखी गई इस किताब में गांधी का राष्ट्रवाद, भगतसिंह की फांसी पर उनका रुख, जिन्ना से संबंधों, धर्मनिरपेक्षता, दलित उत्थान, हिंदुत्व और लोकतंत्र में असहमति के महत्व जैसे विषयों को प्रमुखता से उभारा गया है। बदलते दौर में देश के हालात पर चिंता जताते हुए किताब में इस समय यदि गांधी होते विषय पर भी विचार जताएं गए हैं।

गांधी के लोकतंत्र में असहमति का महत्व पर किताब में लिखा गया है कि ”गांधी का लोकतंत्र समभाव,सहभागिता और भागीदारी पर आधारित रहा। बहुमत की सत्ता और लोकतंत्र को राज्य द्वारा नियंत्रित करने की नीति के गांधी आलोचक रहे”। इस किताब के विषयों के साथ ही जाने माने कार्टूनिस्ट इस्माइल लहरी ने चित्रांकन से गांधी की अभिव्यक्ति और प्रासंगिकता को व्यक्त किया है।
इस पुस्तक में 31 विषय …
1-दुनिया में गांधी
2-गांधी होने का अर्थ
3-गांधी का सपना
4- गांधी का राष्ट्रवाद
5- गांधी के तरीके
6- गांधी की संस्कृति
7-गांधी की आजादी
8-गांवों के गांधी
09- गांधी का हिन्द स्वराज
10- गांधी का धर्मनिरपेक्ष भारत
11- गांधी का लोकतंत्र
12- गांधी और कश्मीर
13- गांधी का नेतृत्व
14- गांधी और शिक्षा व्यवस्था
15- गांधी और अर्थव्यवस्था
16- गांधी और भगतसिंह
17- गांधी और जिन्ना
18- गांधी, अम्बेडकर और दलित उत्थान
19- गांधी,अम्बेडकर और लोकतंत्र की चुनौतियां
20- गांधी और अन्य धर्मावलम्बी
21- गांधी का हिंदुत्व
22- अस्पृश्यता का प्रायश्चित
23-आजादी के दिन गांधी का संघर्ष
24- गांधी विभाजन को आजादी मिलने तक क्यों टालना चाहते थे
25- गांधी के साम्प्रदायिकता से निपटने के तरीके
26- गांधी के लोकतंत्र में असहमति का महत्व
27- गांधी जरूरी है
28-अपने ही देश में गांधी का संकट
29-इस समय यदि गांधी होते
30- गांधी से बढ़कर कोई देशभक्त नहीं
31-आइये हम सभी गांधी के वर्ण के हो जाए…..
लेखक – डॉ. ब्रह्मदीप अलूने – संपर्क-9755 333 595