ट्रंप और मोदी की दोस्ती में पड़ी दरार, भारत को अब नहीं मिलेगा WTO का फायदा

0
86

नई दिल्ली। पिछले दिनों अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं की मुलाकात का मुद्दा दुनियाभर में छाया रहा, मगर इस महामुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत और चीन के प्रति सख्त रूख अपनाया है। ट्रंप ने चौंकाने वाला बयान देता देते हुए कहा कि भारत और चीन अब विकासशील देश नहीं रहे हैं। इसके बावजूद भी दोनों ही देश विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से विकासशील दर्जे के तहत मिलने वाले फायदे ले रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि उनके प्रशासन ने डब्ल्यूटीओ को पत्र लिखकर गुजारिश की है कि भारत और चीन को इसके तहत फायदा नहीं देने की बात कही।

ट्रंप ने कहा कि डब्ल्यूटीओ अब तक चीन को विकासशील देश मानता था, मगर हमने पत्र लिखकर डब्ल्यूटीओ से कहा कि वह चीन को इस दर्जे से अलग करें। इतना ही नहीं, हम भारत को अब विकासशील देश के दर्जे में नहीं रख सकते, क्योंकि दोनों ही देश अमेरिका को कड़ी टक्कर दे रहे हैं, इसलिए हम दोनों देशों को फायदा नहीं दे सकते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेडवार को लेकर तनाव चल रहा है। इसी बीच डब्ल्यूटीओ को लिखे पत्र के बाद दोनों देशों तनाव जैसी स्थिति निर्मित हो गई है। इसका असर दुनियाभर पर दिखाई देगा। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने चीन से आयात होने वाले सामान पर शुल्क बढ़ा दिया है।

चीन ने भी जवाबी शुल्क लगाते हुए अमेरिका के सामान पर टैक्स बढ़ाया है। इससे पहले, जुलाई में अमेरिकी राष्ट्रपति डब्ल्यूटीओ से यह साफ करने के लिए कहा था कि वह किस आधार पर किसी भी देश को विकासशील देश का दर्जा देता है, उस समय भी यह माना जा रहा था कि ट्रंप के यह पूछने का मतलब चीन, तुर्की ओर भारत जैसे देशों को इस दर्जे से अलग करना था। विकासशील देशों को डब्ल्यूटीओ से वैश्विक व्यापार नियमों के तहत रियायत मिलती है। ट्रंप ने उस समय अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) को अधिकार देते हुए यह भी कहा था कि यदि कोई विकसित अर्थव्यवस्था डब्ल्यूटीओ की खामियों का लाभ उठाती है तो वह उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here