अमिताभ बच्चन के घर के बाहर छात्रों ने किया प्रदर्शन

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के एक ट्वीट पर बवाल मचा हुआ है इस ट्वीट में उन्होंने इशारों ही इशारों में आरे जंगल विवाद पर मुंबई मेट्रो का समर्थन किया है।

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सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के एक ट्वीट पर बवाल मचा हुआ है। इस ट्वीट में उन्होंने इशारों ही इशारों में आरे जंगल विवाद पर मुंबई मेट्रो का समर्थन किया है। जिसके बाद ‘बिग बी’ को सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, उनके घर ‘जलसा’ के बाहर लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को भी कुछ छात्रों ने अमिताभ के घर के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद मौके पर पहुंच पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लिए जाने का एक वीडियो ट्वीट किया गया है। इस वीडियो में कई महिला पुलिसकर्मी अमिताभ बच्चन के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं को घसीटते हुए पुलिस वैन में डालते हुए नजर आ रही हैं। फिलहाल हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा किया गया है या नहीं, अभी इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

मामला अमिताभ बच्चन के ट्ववीट से रिलेटेड था, इस ट्वीट में अमिताभ बच्चन ने लिखा ‘मेरे एक दोस्त को मेडिकल इमरजेंसी थी, उसने अपनी कार के बजाय मेट्रो से जाने का निर्णय लिया. बहुत इम्प्रेस होकर वापस आए वो. कहा कि ये तेज़, सुलभ और काफी काबिल है। प्रदूषण का उपाय। ज्यादा पेड़ लगाए। मैंने अपने बगीचे में ये किया, क्या आपने किया?’

इन सभी में बात कमोबेश ये हो रही है कि अमिताभ ने ये बात आरे फॉरेस्ट्स को बिना ध्यान में रखे कही। मामला ये है. महाराष्ट्र के आरे जंगल बेहद घने हैं। वहां पर मेट्रो रेल का शेड बनाने की बात चली। उसके लिए हज़ारों पेड़ गिराने पड़ते. लेकिन इसका विरोध हुआ। फिर कहा गया कि आरे से जमीन लेने की जगह वडाला से ज़मीन लेकर वहां मेट्रो कार शेड बनाया जाएगा। आरे फॉरेस्ट्स में अगर कटाई हुई, तो सीधा असर वहां के वन्य जीवन और आस-पास के इलाकों पर पड़ेगा। इस बात को लेकर लगातार विरोध दर्ज कराए गए।

अमिताभ बच्चन के इस ट्वीट के बाद लोगों ने उनको ये याद दिलाया कि मेट्रो भले ही विकास का प्रतीक हो, लेकिन पर्यावरण और इंसानियत के भविष्य की कीमत पर उसे लाना क्या सही निर्णय होगा? इस वक़्त एमेज़न के वर्षावन धधक रहे हैं. ग्रीनलैंड के पास के ग्लेशियर पिघल रहे हैं। ऐसे में बिना धरती और पर्यावरण की सोचे कोई भी कदम उठाना कितना खतरनाक हो सकता है, इस पर सोचना ज़रूरी है. बेहद ज़रूरी।

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