Indore: कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि महापौर श्री पुष्य मित्र भार्गव एवं विशेष अतिथि विधायक श्री रमेश मेंदोला उपस्थित थे।
प्रथम चरण में झंडावंदन कार्यक्रम का आयोजित किया गया जिसमें श्री गुरूजी सेवा न्यास स्थल पर एक साथ 75 राष्ट्रीय ध्वजों का ध्वजारोहण किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ वंदेमातरम् से हुआ। एक-एक करके 74 ध्वज फहराये गए एवं अंत में 29 फीट ऊंचाई पर एक बड़ा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया तत्पश्चात राष्ट्रीय गान ‘जन-गण-मन’ हुआ।

मुख्य अतिथि पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि किसी भी देश का भविष्य तभी उज्ज्वल होता है जब वह अपने पिछले अनुभवों और विरासत के गौरव के साथ पल-पल जुड़ा रहता है। हम सभी जानते हैं कि भारत के पास एक समृद्ध ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का एक अथाह भंडार है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय चेतना को भारत के घर-घर पहुँचाने के लिए इस प्रकार के आयोजन हो रहे हैं। कार्यक्रम का समन्वय श्री गुरुजी सेवा न्यास के संयोजक गोपाल गोयल तथा मुकेश हजेला ने किया।

Must Read- शिंदे कैबिनेट में हुआ विभागों का बंटवारा, फडणवीस संभालेंगे गृह और वित्त मंत्रालय

द्वितीय चरण सीए भवन में इंदौर सीए शाखा के संयुक्त तत्वावधान में व्याख्यान एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। “एक शाम देश के नाम” इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रसिद्ध वक्ता प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि भारत के उज्जवल भविष्य के लिए हमें सही इतिहास पढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश का विभाजन टाला जा सकता था किंतु उस समय के नेतृत्व ने जानबूझकर ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि भारत में महाराजा रणजीत सिंह जैसे राजा भी हुए जिन्होंने लूटा हुआ धन वापिस भारत लाने जैसा साहसिक कार्य किया।

मुख्य अतिथि सुनील चोरड़िया ने कहा कि आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने के साथ साथ हमें भारत के अगले 25 वर्षों के विकास का रोडमेप भी तय्यार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व आज भारत को एक बड़े मन्यूफेक्चरिंग हब के रूप में देख रहा है। यदि सही नीतियों के साथ आगे चला जाए तो आने वाले दिनों में भारत पूरे विश्व का बड़ा व्यापारिक केंद्र बन सकता है।

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में प्रोफेसर (डॉ) श्याम सुन्दर पलोड ने अपनी रचना सुनाते हुए कहा कि
“तप चुका है लहू हमारा चढ़ गया ऊंचा पारा है ।
शेरों के वंशज को देखो बकरियों ने ललकारा है ।
जमी राख के नीचे देखो धधकता हुआ अंगारा है ।
जहां राम ने जन्म लिया वो पूरा अयोध्या हमारा है ।”

आष्टा से पधारे महेन्द्र मधुर ने कहा
” किसी मंदिर किसी मस्जिद से भी पावन तिरंगा है ।
अगर है जिंदगी एक धूप तो सावन तिरंगा है ।
किसी को क्या पता क्या है तिरंगा जान लो इतना ,
हमारा तन , हमारा मन , हमारा धन तिरंगा है । ”

जयपुर से पधारे अशोक चारण ने अपनी रचना सुनाते हुए कहा
” मेरी मौत को मिले तिरंगा ,
मरकर भी जी जाऊंगा । ”

कार्यक्रम का संचालन सीए अभय शर्मा ने किया। स्वागत भाषण सीए आनंद जैन एवं धन्यवाद अभिभाषण गोपाल गोयल ने दिया। इस अवसर पर डॉक्टर मुकेश मोढ़, विवेक गोरे, सीए कीर्ति जोशी, सीए रजत धानुक़ा, सीए अतिशय खासग़ीवाला, सीए सुनील जी खंडेलवाल, संदीप ज़मींदार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।