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शिवराज के लगाए पौधे नजर नहीं आते नर्मदा किनारे

Posted on: 14 Jan 2019 10:53 by Ravindra Singh Rana
शिवराज के लगाए पौधे नजर नहीं आते नर्मदा किनारे

कीर्ति राणा 

मप्र की चिकित्सा शिक्षा-संस्कृति मंत्री  डॉ विजयलक्ष्मी साधो ने अवंतिका के एक सवाल के जवाब मे। स्पपष्हट कहा कि नर्मदा किनारे  आम लोगों के द्वारा लगाए पौधे तो नजर आते हैं लेकिन शिवराज सिंह ने नर्मदा परिक्रमा के दौरान यात्रा मार्ग पर पौधे लगाने का दावा किया था वो पौधे नजर नहीं आते।

प्रेस क्लब और संगीत कला संदेश की संयुक्त पहल पर डॉ साधो शहर के रंगकर्मियों से संस्कृति संवाद करने के बाद जब मीडिया से चर्चा कर रही थीं तब अवंतिका ने उनसे पूछा कि आप निमाड़ के उस क्षेत्र से हैं जहां से नर्मदा गुज़रती है और शिवराज सरकार ने नर्मदा यात्रा वाले पूरे बहाव मार्ग पर करोड़ों पौधे लगाने का दावा किया था। उन पौधों की अब क्या स्थिति हैं? डॉ साधो ने मुस्कुराते हुए कहा सामान्य यात्रियों ने जो पौधे लगाए वह तो नजर आते हैं लेकिन शिवराज जी ने पौधे कहाँ लगाए नजर नहीं आते।

तो क्या आप ऐसा मानती हैं कि पौधा रोपण के नाम पर धाँधली हुई, क्या सरकार जांच कराएगी? डॉ साधो ने कहा बिल्कुल जाँच कराएँगे। शिवराज सरकार में बहुत कुछ गलत हुआ है, उन सब मामलों की जाँच कराएँगे। कमलनाथ सरकार जनता द्वारा चुनी गई सरकार है, कमलनाथ जी वचनपत्र का हर वादा पूरा करके दिखाएँगे। संस्कृति मंत्रालय से बीते पंद्रह वर्षों में कई संस्थाओं को भरपूर अनुदान तो मिला लेकिन इन संस्थाओं ने किया कुछ नहीं? उन्होंने कहा मुझे भी जानकारी मिली है ऐसी संस्थाओं से अनुदान के उपयोग की जानकारी पता करेंगे, दोषी संस्थाओं पर कार्रवाई करेंगे, साथ ही जो संस्थाएँ वाकई काम कर रही हैं और अनुदान से वंचित हैं उन्हें आगे बढ़ाएँगे।

साँची स्थित बौद्ध विश्वविद्यालय को लेकर भी संस्कृति मंत्री ने कार्य व्यवस्था संतोषप्रद नहीं होने के संकेत दिए हैं। जब अवंतिका ने उनसे साँची बौद्ध विवि के संबंध में पूछा तो उनका कहना था जिन उद्देश्यों को लेकर इस विवि में काम होना था वैसा हो नहीं रहा है। इस संबंध में जल्दी ही फैसला लेंगे। शिवराज सरकार ने कभी धम्म सम्मेलन जैसे बड़े आयोजन किए हैं क्या ऐसे आयोजन होते रहेंगे? उनका कहना था प्रदेश की जनता का हम पर विश्वास है हमें प्रचार के नाम पर फ़िज़ूलख़र्ची की जरूरत नहीं है। कमलनाथजी पहले दिन से ही बिना प्रचार प्रसार के प्रदेश की जनता के हित में निर्णय ले रहे हैं।

खुद संस्कृति मंत्री साधौ नोट करती रहीं कलाकारों के सुझाव
ऐसा दृश्य भी पहली बार देखने को मिला जब संस्कृति संवाद के दौरान एक के बाद एक कलाकार अपना नाम बताने के साथ संस्कृति मंत्रालय से जुड़े सुझाव देने के साथ ही परेशानी बता रहे थे और खुद संस्कृति मंत्री साधौ सिलसिलेवार सुझाव नोट करती जा रही थीं। उन्होंने ये विश्वास भी दिलाया कि  कलाकार और कला संस्कृति के उत्थान का हरसंभव प्रयास करेंगी।विभिन्न विधाओं से जुडे शहर के कलाकारों ने

निम्न सुझाव दिए –
1. संगीत और नाटक संबंधी गतिविधियों के लिए अच्छे सभागृह की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
2. सभागृह न्यूनतम दरों पर उपलब्ध कराया जाए।
3. देवलालीकर कला वीथिका और ललित कला संस्थान की दशा सुधारी जाए।
4. दिल्ली में बनाए जा रहे मप्र भवन में आर्ट गैलरी का भी निर्माण किया जाए जिससे प्रदेश के कलाकार वहां अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें।
5. लता मंगेशकर अलंकरण समारोह जो अपनी गरिमा खोता जा रहा है, उसे पुनः पुराना गौरव और भव्यता प्रदान की जाए।
6. इंदौर घराने के संस्थापक उस्ताद अमीर खां की स्मृति में होनेवाले समारोह राग अमीर को जनभिमुख बनाया जाए।
7. सरकारी स्कूलों में कला व संगीत शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य की जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा कलाकारों को रोजगार मिल सके।
9.बुजुर्ग कलाकारों के लिए इलाज और पेंशन की व्यवस्था की जाए।
10. बड़े संगीत जलसों में स्थानीय कलाकारों को प्रस्तुति देने का मौका दिया जाए।
11. कला- संस्कृति के उत्थान में जुटी संस्थाओं को अनुदान देने की प्रक्रिया सरल की जाए।
12. लेखक और साहित्यकारों की पुस्तकों के प्रकाशन में सरकारी मदद दी जाए।

इन संस्कृतिकर्मियों ने सुझाव दिए
पद्मश्री भालू मोंढे, शशिकांत ताँबे, कैलाश पंवार,अ सलाम नौशाद, मेघा खानविलकर, सँध्या भराड़े, कुलवंत सिंह शैरी,डॉ मनीष, सत्यनारायण व्यास (सूत्रधार),सुशील गोयल,नासिर जमाल, चित्रा खिडवडकर, प्रदीप कनिक,देवरिया, शुभा वैद्य,श्रीकृष्ण बेडेकर अजय पुन्यासी, शोभा चौधरी, अभय माँड़के,विलास सप्रे, रियाजुद्दीन शेख, दिव्यांश व्यास, शैलेंद्र शर्मा और उस्ताद अमीर खान के पुत्र शाबाश खान ने ( मुंबई से टेलीफ़ोन पर) अपने सुझाव दिए।प्रारंभ में प्रेस क्लब अध्यक्षअरविंद तिवारी ने बैठक संबंधी जानकारी दी, महासचिव नवनीत शुक्ला ने आभार माना, अभिषेक गावड़े और संजीव गलते आदि ने डॉ साधौ का स्वागत किया।

दिल्ली में बनाए जा रहे मप्र भवन में आर्ट गैलरी भी बनाई जाए संस्कृति मंत्री डॉ साधौ को पत्रकार कीर्ति राणा ने सुझाव दिया कि जिस नए मप्र भवन निर्माण के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भूमिपूजन किया है।इस भवन में एक आर्ट गैलरी भी निर्मित की जाए ताकि मप्र के कलाकार वहां चित्र प्रदर्शनी लगा सके, अन्य विधा के कलाकार भी इसका उपयोग कर सकें। यह भी सुझाव दिया कि मप्र के विभिन्न दिलों सहित अन्य राज्यों में कला संस्कृति कार्यक्रम पेश करने वाले कलाकार या समूह को यात्रा भाड़े में रियायत दी जाए।

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