सत्य सनातन धर्म : आज है पवित्र सावन माह की शिवरात्रि, भगवान शिव और माता पार्वती की बरसती है कृपा

वर्ष में प्रत्येक महीने में एक शिवरात्रि आती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। परन्तु आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर आने वाली यह शिवरात्रि, श्रावणी शिवरात्रि के रूप में विशिष्ट होती है। भगवान शिव के अभिषेक, व्रत और पूजन की है परम्परा। फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी होती है महाशिवरात्रि।

आज है श्रावण मास की शिवरात्रि (Shivratri) है। वर्ष में प्रत्येक महीने में एक शिवरात्रि आती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। परन्तु आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर आने वाली यह शिवरात्रि, श्रावणी शिवरात्रि के रूप में विशिष्ट (Specific) होती है। सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को अतिप्रिय है, इसलिए यह शिवरात्रि विशेष महत्व रखती है। प्रत्येक महीने आने वाली मासिक शिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित होती है।

भगवान शिव के अभिषेक, व्रत और पूजन की है परम्परा

प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली मासिक शिवरात्रि के साथ ही इस विशेष महत्व वाली श्रावणी शिवरात्रि पर भी भगवान शिव के दूध, दही, शहद, शकर और जल से अभिषेक किया जाना चाहिए और बिल्वपत्र, पुष्प और धतूरा अर्पित करना चाहिए । साथ ही माता पार्वती को पुष्प और प्रतीक स्वरूप शृंगार सामग्री भेंट भी अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही प्रत्येक मासिक शिवरात्रि पर व्रत और उपवास की भी परम्परा है, जिसे सात्विक भाव से करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी होती है महाशिवरात्रि

वैसे तो वर्ष के प्रत्येक महीने में एक शिवरात्रि आती है। जिन्हे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है परन्तु फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता जगतजननी पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। यह महापर्व पुरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। सभी आकार में छोटे बड़े शिव मंदिरों पर श्रद्धालु भक्तो की विशेष भीड़ इस दिन देखने को मिलती है। कई स्थान पर इस दौरान मेले का भी आयोजन होता है, जोकि कई दिनों तक चलता है।