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कथा में साबूदाने की खिचड़ी बांट कर राजकुमार साबू ने दिलाई सच्चा मोती को पहचान

Posted on: 26 May 2018 12:42 by Praveen Rathore
कथा में साबूदाने की खिचड़ी बांट कर राजकुमार साबू ने दिलाई सच्चा मोती को पहचान

इंदौर। मालवा के खान-पान के शौकीनों को साबूदाने के स्वाद से परिचित कराने वाले और इंदौरवासियों को साबूदाने की खिचड़ी के जायके से परिचय कराने वाले साबू परिवार ने आज सच्चामोती ब्रांड को इस कदर लोकप्रिय बना दिया है कि इसके बिना व्रत-उपवास पूरे नहीं होते। कोलकाता से पढ़ाई के लिए इंदौर आए राजकुमार साबू और उनके भाई शिवनारायण साबू ने 1972 में छोटे रूप में इंदौर में साबूदाने के कारोबार की शुरुआत की। उन दिनों साबूदाने का प्रचलन न के बराबर हुआ करता था। फलाहार में लोग सिंघाड़ा, राजगिरा और फलों का सेवन करते थे। दोनों साबू बंधुओं ने इंदौर में साबूदाना के कारोबार की शुरुआत शिव ट्रेडिंग की स्थापना के साथ की और आज देशभर में सच्चामोती ब्रांड को घर-घर तक पहुंचा दिया। राजकुमार साबू ने शुरुआती चरण में साबूदाना के उपयोग के लिए इंदौर में कई इवेंट किए। धार्मिक कथाओं व आयोजनों में साबूदाने की खीर और साबूदाने की खिचड़ी नि:शुल्क बंटवाई। लोगों को साबूदाना के स्वाद से परिचय करवाया। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता चला गया और आज सच्चामोती एक बेहतर और उच्च गुणवत्ता के ब्रांड के रूप में पहचान बना चुका है। घमासान डॉटकॉम ने शिव ट्रेडिंग कंपनी के श्री राजकुमार साबू से बातचीत की, प्रस्तुत है प्रमुख अंश…

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सवाल : इंदौर में कारोबार की शुरुआत कब और कैसे की?
जवाब : हम कोलकाता में रहते थे। वहां पिताजी श्री सीतारामजी साबू का किराने का व्यापार था। पिताजी ने 1972 में मुझे और मेरे भाई को माताजी श्रीमती चंद्रकांता साबू के साथ इंदौर पढ़ाई करने के लिए भेजा था। चूंकि पितााजी का व्यापार था, इसलिए कारोबारी गुण तो थे ही, इंदौर में पढ़ाई करने के साथ-साथ यहां कारोबार की संभावना दिखी। हालांकि उन दिनों मेरी उम्र महज 12 साल ही थी। मैं और छोटा भाई शिवनारायण यहां पढ़ाई करने लगे। पढ़ाई करने के साथ-साथ ही माताजी ने शिव ट्रेडिंग कंपनी की स्थापना की। बस तभी से कारोबार में भी हाथ बंटाने लगे। शिव ट्रेडिंग के माध्यम से हम तमिलनाडु से साबूदाना मंगवा कर इंदौर में बेचते थे। उन दिनों ब्रांड को लेकर न इतनी जागरूकता थी और न ही व्यापारी पैकिंग का खर्च उठाना चाहता था। इसलिए व्यापारी खुला सामान ही बेचना पसंद करता था। हमने धीरे-धीरे साबूदाना को आकर्षक पैकिंग में बेचना शुरू किया। पैकिंग के साथ ही माल की गुणवत्ता और क्वालिटी भी मेंटेन की। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया और आज देशभर में सच्चा मोती ब्रांड बन चुका है।

सवाल : साबूदाना एक्सपोर्ट की आपकी कोई योजना है?
जवाब : फिलहाल हम देशभर में सच्चामोती ब्रांड के तहत साबूदाना, पोहा और खोपरा बूरा बेच रहे हैं। हमारे कई वितरक हैं जो सउदी अरब तक माल भेजते हैं। निकट भविष्य में हम सीधे अरब देशों में एक्सपोर्ट की योजना बना रहे हैं।

सवाल : आपने जब साबूदाने का कारोबार शुरू किया, तब मार्केट में डिमांड कैसी थी?
जवाब : साबूदाना उन दिनों मालवा क्षेत्र में लोकप्रिय नहीं हुआ करता था। न ही लोग ज्यादा पसंद करते थे जबकि कोलकाता में साबूदाने की अच्छी डिमांड होती थी। वहां के डॉक्टर भी साबूदाना का सूप पीने के लिए कहते हैं क्योकि कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अच्छी होती है, यह पाचनशक्ति के लिए भी गुणकारी होता है। साबूदाना सेलम में होता है, मालवा के लोग इसके बारे में ज्यादा जानते नहीं थे, इसलिए मार्केट साइज भी बहुत कम था। हम दोनों भाइयों ने 12 साल की उम्र में ही पढ़ाई के साथ-साथ कारोबार की शुरुआत की। 1976 में हायर सेकंडरी की, इससे साथ ही व्यापार की शुरुआत की। साथ-साथ बीकॉम, एलएलबी तक पढ़ाई भी की। 1980 के दशक में हमने घर-घर जाकर साबूदाना की क्वालिटी और इसके गुणों के बारे में लोगों को जागरूक किया। कई सारे इवेंट किए। धार्मिक आयोजनों कथाओं आदि में साबूदाने की खिचड़ी और खीर बनाकर मुफ्त बांटते थे, धीरे-धीरे खिचड़ी का प्रचलन बढऩे लगा और मार्केट में डिमांड भी निकलने लगी।

सवाल : सच्चामोती नाम कैसे सूझा?
जवाब : हमने क्वालिटी से कभी समझौता नहीं किया। मोती का कलर सफेद होता है लेकिन असली मोती थोड़ा-सा पीलापन लिए होता है, हमारा कहना था कि हर सफेद चीज मोती नहीं होती, उसमें ठोसपन भी होना चाहिए और हमारे प्रोडक्ट में ठोस गुणवत्ता और सफेद कलर दोनों है, इसलिए नाम सच्चामोती रखा।

सवाल : आप और किन संस्थाओं से जुड़े हैं?
जवाब : कारोबारी व्यस्तता के बावजूद मैं माहेश्वरी समाज की संस्थाओं से जुड़ा हूं। इसके अलावा भारत विकास परिषद का अध्यक्ष हूं। विश्वनाथ धाम में ट्रस्टी हूं। सिर्फ व्यापार बढाना ही मेरा लक्ष्य नहीं है बल्कि देश व समाज के प्रति भी मेरा कर्तव्य है
जिन्हें निभाने का मैं पूरा प्रयत्न कर रहा हूँ।

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