राहुल गांधी फिर बन सकते हैं पार्टी अध्यक्ष, भाजपा की ये कमजोरी बनी ताकत!

0
89
rahul gandhi

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में एक महीने तक चले सियासी घटनाक्रम के बीच भाजपा को मुंह की खाना पड़ी, आखिकार कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी ने मिलकर सरकार बना ली है। इससे भाजपा को बड़ा झटका लगा है। महाराष्ट्र में उम्मीद से अधिक अच्छे परिणाम मिलने से कांग्रेस में नई जान आ गई है। पार्टी के सूत्रों मुताबिक झारखंड विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करेगी। अब ऐेसे में फिर से कयास लगाए जा रहे हैं कि राहुल गांधी फिर से पार्टी की कमान संभाल सकते हैं। इतना ही नहीं, पार्टी में इसकी चर्चा भी शुरू हो गई है। इस फेरबदल में महाराष्ट्र घटनाक्रम की अहम भूमिका मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमंडल के लिए बाला साहेब थोराट, नितिन राउत और नाना पटोले का नाम सुझाया था। हालांकि मंत्रिमंडल के लिए थोराट के साथ अशोक चह्वाण और पृथ्वीराज चह्वाण के नाम भी शामिल थे।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार नितिन राउत और नाना पटोले के नाम राहुल गांधी ने दिए हैं। दोनों को ही राहुल का करीबी माना जाता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी अब खुद भी पार्टी की कमान संभालने के इच्छुक हैं। इधर, भाजपा के गिरते जनाधार के चलते भी राहुल गांधी को आत्मविश्वास बढ़ा है। हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा अपने दम सरकार नहीं बना पाई। वहीं कांग्रेस को उम्मीद से अच्छे परिणाम मिले हैं। कांग्रेस अब चाहती है कि विपक्ष में रहकर फ्रंट फुट पर बैटिंग करें। फिलहाल देश में अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी और महंगाई का मुद्छा छाया हुआ है। इधर, लोकसभा में प्रज्ञा ठाकुर के विवाद में भी राहुल ने आक्रामक प्रतिक्रिया दी और लोकसभा में भाजपा सांसद द्वारा विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की घोषणा के जवाब में कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं।

इन दो सार्वजनिक हस्तक्षेपों से राहुल ने विपक्ष की राजनीति में खुद को फिर आगे ला दिया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार के गठन में राहुल गांधी का अच्छा खासा दखल रहा है। राहुल पुराने ढांचे को बदलना चाहते हैं, इसी के चलते नए लोगों के नए मंत्री पद के लिए प्रस्तावित किए थे। अगर राहुल को फिर पार्टी अध्यक्ष बनाया जाना है, तो उसकी क्या प्रक्रिया होगी, इस सवाल के जवाब में कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य रहे एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि कार्यसमिति की बैठक बुलाकर यह फैसला कभी भी लिया जा सकता है और बाद में उसका महासमिति का अधिवेशन बुलाकर उसका अनुमोदन कर लिया जाएगा। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अभी पार्टी के शीर्ष स्तर पर इस पर राय मशविरा हो रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here