अब सांची भी बनायेगी आईसक्रीम, 3.50 करोड़ रूपए से अधिक का प्लांट होगा स्थापित

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akash tripathi

इंदौर सहकारी दुग्ध संघ (सांची) द्वारा उपभोक्ताओं के लिये 3.50 करोड़ रूपये से अधिक की लागत का संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को अब सांची की आईसक्रीम भी ‍मिलेगी। इंदौर संभाग में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिये 150 नई दुग्ध्‍ उत्पादक समितियों का गठन किया जायेगा। इन समितियों को डेयरी के लिये ऋण भी दिया जायेगा। सांची के दूध विक्रय में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दूध से बने अन्य उत्पादों के विक्रय तथा लाभांश में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
यह जानकारी संभागायुक्त श्री आकाश त्रिपाठी ने आज संपन्न हुई इंदौर सहकारी दुग्ध संघ (सांची) की 36वीं वार्षिक साधारण सभा में दी।

त्रिपाठी ने कहा कि मिलावट के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। मिलावट कई मामले सामने आ रहें हैं। इनके रोकथाम के लिये यह अभियान कारगर साबित हो रहा है। आज सांची के सामने विश्वशनीयता की बड़ी चुनौती है। उन्होने कहा कि हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम उपभोक्ताओं को अपनी पहचान के अनुरूप शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उपलब्ध कराये। अपनी पहचान का हरहाल में कायम रखा जाये। उन्होने कहा कि दुग्ध उत्पादक सदस्यों एवं उपभोक्ताओं के सतत् सहयोग से संघ के व्यवसाय में निरंतर वृद्धि हो रही है। दुग्ध संघ का वार्षिक टर्न-ओवर वर्ष 2017-18 में 516 करोड़ रूपये था, जिसमें 12 प्रतिशत की वृद्धि होकर वर्ष 2018-19 का टर्न-ओवर 580.27 करोड़ रूपये हो गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में वार्षिक कार्ययोजना अनुसार 618 करोड़ होना संभावित है। दुग्ध संघ द्वारा वर्ष 2017-18 में 1899.06 लाख रूपये का लाभ अर्जित किया गया एवं वर्ष 2018-19 में 2692.26 लाख रूपये का लाभ हुआ, जो संघ की प्रगति का परिचायक है।

उन्होने कहा कि प्रदेश में केवल इंदौर सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित इंदौर द्वारा वर्ष 2013-14 से निरंतर दुग्ध सहकारी समितियों को लाभांश एवं बोनस वितरण किया जा रहा है। वर्ष 2016-17 का 494 करोड़ रूपये दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को लाभांश एवं बोनस मद में भुगतान किया जा रहा है, जिसका लाभ दुग्ध उत्पादक कृषकों को दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के माध्यम से प्राप्त होगा। दुग्ध संघ के अंतर्गत दुग्ध सहकारी समितियों द्वारा वर्ष 2018-19 में 9.11 करोड़ रूपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया गया।

उन्होने बताया कि दुग्ध संयंत्र की क्षमता पूर्व में 2.60 लाख लीटर प्रतिदिन थी। वर्ष 2018-19 में स्वचलित आधुनिक मशीनों से क्षमता विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण कर 4 लाख लीटर प्रतिदिन की गई। संयंत्र विस्तार अंतर्गत स्वचलित सीआईपी सिस्टम, होमोनाइजर, क्रीम संप्रेटर, डी-ओडोराइजर एवं घी-क्लेरिफयर की स्थापना की गई। नवीन ऑटोमेटिक प्लांट मशीनरी स्थापना होने से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की गुणवत्ता में अत्यधिक सुधार परिलक्षित हुआ है, जिससे उपभोक्ताओं में सांची दूध एवं दुग्ध उत्पादों के प्रति विश्वास बढ़ा है। उपरोक्त मशीनरी स्थापना के बाद पुरानी स्थापित मशीनों को, ऑटोमेशन के लिये 447 लाख रूपये स्वीकृत किये गये। ऑटोमेशन के पश्चात संसाधन की समस्त प्रक्रिया स्वचलित हो जायेगी।

दुग्ध संघ के व्यापार को बढ़ाने के लिये मुख्य संयंत्र पर आईसक्रीम प्लांट 3.53 करोड़ रूपये लागत से स्थापित किया जा रहा है, ‍जिसमें शासन से 2.53 करोड़ रूपये की वित्तीय सहयोग एवं एक करोड़ रूपये दुग्ध संघ के वित्तीय स्त्रोत से व्यय होगा।

दुग्ध संघ की प्रयोगशाला को एनएबीएल (नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड ऑफ लेबोरेटरी) से प्रमाणीकरण के लिये कार्यवाही प्रारंभ की जा रही है। एनएबीएल प्रमाणीकरण के पश्चात दुग्ध संघ की प्रयोगशाला को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा प्राप्त हो गया है।

त्रिपाठी ने बताया कि दुग्ध संघ का कार्यक्षेत्र 10 जिलों से संचालित है। वर्ष 2018-19 से औसत दुग्ध संकलन 3.35 लाख लीटर प्रतिदिन, 1475 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से संकलित किया गया। वार्षिक कार्ययोजना अनुसार वर्ष 2019-20 में 150 नवीन दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया जाना प्रस्तावित है। औसत दुग्ध संकलन का लक्ष्य 3.72 लाख लीटर प्रतिदिन होगा। फरवरी 2019 तक दुग्ध

क्रय भाव 500 रूपये प्रति किलो फेट था, जिसमें क्रमश: वृद्धि करते हुए वर्तमान में 610 रूपये प्रतिकिलो फैट की दर में भुगतान किया जा रहा है। इसमें 40 रूपये प्रति किलो फैट की ओर वृद्धि की गई है। अब 650 रूपये प्रति किलो फैट की दर हो जायेगी। आगामी समय में संकलन-विक्रय मात्रा, प्रतिस्पधी ब्रॉण्डों एवं राष्ट्रीय स्तर पर दुग्ध चूर्ण एवं मख्खन के बाजार भाव की समीक्षा पश्चात क्रय दर में वृद्धि की जा सकेगी।

उन्होने बताया कि वर्ष 2017-18 में औसत दुग्ध विक्रय 2.51 लाख लीटर प्रतिदिन विक्रय हुआ था। वर्ष 2018-19 में 3 प्रतिशत की वृद्धि होकर 2.58 लाख लीटर प्रतिदिन दूध विक्रय किया गया। इस वर्ष 2.76 लाख लीटर दूध प्रतिदिन विक्रय का लक्ष्य है।

घी विक्रय वर्ष 2017-18 में 1154 मेट्रिक टन था। वर्ष 2018-19 में 22.8 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 1417 मेट्रिक टन विक्रय किया गया। वर्ष 2019-20 हेतु वार्षिक कार्ययोजना में 1670 मेट्रिक टन का विक्रय लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम को दुग्ध संघ के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। बैठक में सधारण सभा के बड़ी संख्या में सदस्य शामिल थे।

श्री त्रिपाठी ने बताया कि दुग्ध संघ का कार्यक्षेत्र 10 जिलों से संचालित है। वर्ष 2018-19 से औसत दुग्ध संकलन 3.35 लाख लीटर प्रतिदिन, 1475 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से संकलित किया गया। वार्षिक कार्ययोजना अनुसार वर्ष 2019-20 में 150 नवीन दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया जाना प्रस्तावित है। औसत दुग्ध संकलन का लक्ष्य 3.72 लाख लीटर प्रतिदिन होगा। फरवरी 2019 तक दुग्ध क्रय भाव 500 रूपये प्रति किलो फेट था, जिसमें क्रमश: वृद्धि करते हुए वर्तमान में 610 रूपये प्रतिकिलो फैट की दर में भुगतान किया जा रहा है। इसमें 40 रूपये प्रति किलो फैट की ओर वृद्धि की गई है। अब 650 रूपये प्रति किलो फैट की दर हो जायेगी। आगामी समय में संकलन-विक्रय मात्रा, प्रतिस्पधी ब्रॉण्डों एवं राष्ट्रीय स्तर पर दुग्ध चूर्ण एवं मख्खन के बाजार भाव की समीक्षा पश्चात क्रय दर में वृद्धि की जा सकेगी।

उन्होने बताया कि वर्ष 2017-18 में औसत दुग्ध विक्रय 2.51 लाख लीटर प्रतिदिन विक्रय हुआ था। वर्ष 2018-19 में 3 प्रतिशत की वृद्धि होकर 2.58 लाख लीटर प्रतिदिन दूध विक्रय किया गया। इस वर्ष 2.76 लाख लीटर दूध प्रतिदिन विक्रय का लक्ष्य है।

घी विक्रय वर्ष 2017-18 में 1154 मेट्रिक टन था। वर्ष 2018-19 में 22.8 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 1417 मेट्रिक टन विक्रय किया गया। वर्ष 2019-20 हेतु वार्षिक कार्ययोजना में 1670 मेट्रिक टन का विक्रय लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम को दुग्ध संघ के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। बैठक में सधारण सभा के बड़ी संख्या में सदस्य शामिल थे।

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