अब मैं अपने बच्चों को गुड टच और बैड टच कैसे समझाऊं

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लेखिका पद्मा राजेंद्र के कुछ सवाल

फुटबॉल खेलते हुए चौके- छक्के लगाए व क्रिकेट खेलते हुए गोल बनाए तो हँसी व मुस्कुराहट आना स्वाभाविक है ,अगर मैं उसे शाबाश कहू तो, वो पलट कर आप शाबाश दादी ,कहे उस प्यारे से पोते के मुँह से मुझे गोल व रन का गलत जगह उपयोग लुभाता है व मैं खिलखिला कर हँस देती हूँ ।सोचती हूँ समय आने पर सही जगह सही शब्द बोलना भी सीख जाएगा या हम सीखा देंगे…. अभी तो उसकी बाल-सुलभ चपलता व टूटी-फूटी बोली का आनन्द लेने से स्वयं को क्यों वंचित करू….?

जब मै उसे इन बातों के लिए नहीं समझाना चाहती हूं तो “गुड़ टच व बेड टच ” कैसे समझाऊँ …??

पर हर दिन का अख़बार और उसमें छपी वीभत्स घटनाएं रोंगटें खड़े कर देती है। रोज सोचती हूँ कि जिसने अभी पांच वर्ष भी कम्प्लीट नहीं किए उस प्यारे गुप्पी को आज जरूर बेड टच व गुड टच का ज्ञान दूँगी पर यहां आकर शब्दों का टोटा पड़ जाता है …..और रही सही कसर वो तोड़ देता है ….कहानी व रोचक बातों से जहाँ मैं हटी वो मेरे पास से हट जाता हैं…???
पर साहस तो संजोना पड़ेगा ना…????

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