इस दिन पड़ रही है नागपंचमी, पौराणिक कथा से जानें इसका महत्‍व

सावन के कृष्ण पक्ष और शुक्‍ल पक्ष की पंचमी के द‍िन नागपंचमी का त्‍योहार मनाया जाता है.

स साल सावन माह की शुरुआत 14 जुलाई से हो रही है। सावन माह को श्रावण मास भी कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन के महीने में कई व्रत और तत्योहार पड़ते हैं। इन्हीं में से एक है नाग पंचमी, सावन के कृष्ण पक्ष और शुक्‍ल पक्ष की पंचमी के द‍िन नागपंचमी का त्‍योहार मनाया जाता है. इस बार नागपंचमी 2 अगस्त 2022, दिन मंगलवार को मनाई जाएगी. इस दिन घर में गोबर से नाग बनाकर नाग देवता की पूजा की जाती है. माना जाता है कि इससे सर्पदंश का भय दूर होता है साथ ही धन-धान्य भी प्राप्त होता है. इस दिन नाग देवता का दर्शन बेहद ही शुभ माना जाता है.

क्यों मनाया जाता है नागपंचमी का त्योहार

नागपंचमी को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं, पर आज हम आपको इनमें से एक प्रसिद्ध कथा के बारे में बता रहे हैं. एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार,प्राचीन काल में एक सेठजी के सात पुत्र थे और सातों के विवाह हो चुके थे.सबसे छोटे पुत्र की पत्नी बहुत ही सुशील थी, परंतु उसके भाई नहीं था. एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने को पीली मिट्टी लाने के लिए सभी बहुओं को कहा. सभी बहुएं डलिया और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने के लिए निकल गई . जब वह मिट्टी खोद रही थी, तो वहां एक सर्प निकला, जिसे बड़ी बहू खुरपी से मारने लगी.यह देखकर छोटी बहू ने उसे रोकते हुए कहा कि इसे मत मारो ? यह बेचारा निरपराध है. यह सुनकर बड़ी बहू ने उसे नहीं मारा तब सर्प एक ओर जा बैठा. तब छोटी बहू ने उससे कहा कि हम अभी लौट कर आते हैं, तुम यहां से जाना मत. यह कहकर वह सबके साथ मिट्टी लेकर घर चली गई और वहां कामकाज में फंसकर सर्प से जो वादा किया था,उसे भूल गई.दूसरे दिन उसे जब बात याद आई तो सब को साथ लेकर वहां पहुंची और सर्प को उस स्थान पर बैठा देखकर बोली, सर्प भैया नमस्कार! उसको ऐसा बोलते सुनकर सर्प ने कहा कि तू भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठी बात कहने के कारण तुझे अभी डस लेता. उसकी बात सुनकर वह बोली, भैया मुझसे भूल हो गईहै उसके लिए क्षमा मांगती हूं.तब सर्प ने कहा कि अच्छा, तू आज से मेरी बहन हुई और मैं तेरा भाई हुआ, जो तुझे जो मांगना हो, मांग ले. वह बोली, भैया! मेरा कोई नहीं है, अच्छा हुआ जो तू मेरा भाई बन गया इसके बाद कुछ दिन व्यतीत होने पर वह सर्प मनुष्य का रूप रखकर उसके घर आया और बोला कि मेरी बहिन को भेज दो. जब परिवारवालों ने कहा कि इसका तो कोई भाई है ही नहीं, तो वह बोला कि मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूं और बचपन में ही बाहर चला गया था.उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी को उसके साथ भेज दिया. उसने अपनी बहन को मार्ग में बताया कि मैं वहीं सर्प हूं, इसलिए तू डरना नहीं और जहां चलने में कठिनाई हो वहां मेरी पूछ पकड़ लेना. उसने उसके कहे अनुसार वैसा ही किया और इस प्रकार वह उसके घर पहुंच गई. वहां के धन-ऐश्वर्य को देखकर वह चकित हो गई.तभी से नाग देवता को औरते अपना भाई बना कर पूजने लगी।