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माजुली को धरती का स्वर्ग क्यों कहा जाता है ?

किसी समय यह 1250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मे फैला हुआ,संसार का सबसे बढा नदी द्वीप  था।ब्रम्हपुत्र नदी मे स्थित यह द्वीप, पानी के कटाव और मानवजनित कारणो से,वर्तमान मे,केवल 421 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मे ही बचा है।यह भी 2001 का आकलन है।  रेल या सडक मार्ग से सबसे निकट बढा शहर जोरहाट(असम) है।जोरहाट मे,ब्रम्हपुत्र के निमाटी टट से,लगभग दो घंटे की बोटिंग करके यहां पहुंचा जा सकता है।

पुरा द्वीप एक विधानसभा क्षेत्र है,यहां के वर्तमान विधायक सर्बानंद सोनोवाल, असम के मुख्यमंत्री है।जबसे यह मुख्यमंत्री बने है,तभी से माजुली पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों के सामने आया है। माजुली के दक्षिण मे ब्रम्हपुत्र और उत्तर मे सुबनसिरी तथा खेरकुटिया नदी है। माजुली प्राकृतिक सुन्दरता जैवविविधता से परिपूर्ण द्वीप है। दुर्लभ पक्षियों को निकट से निहारने के लिए,वर्षभर यहां,प्रकृति प्रेमियों का,ताता लगा रहता है। यहां कई दुर्लभ और स्थनीय पक्षियों को,वर्षभर स्वछंद रूप से,कलरव करते हुए देखा जा सकता है। धार्मिक रूप से भी यह,वैष्णव संप्रदाय का मुख्य केंद्र है।यहां वर्तमान समय मे भी,बहुत सारे मठ है,जहां विद्यार्थी,घर से दूर,प्रकृति के शांत वातावरण मे, आश्रम पद्धति से,शिक्षा ग्रहण करते है। माजुली मुखौटा निर्माण और रंगमंच कला का भी,मुख्य केंद्र है।

अगली बार जब भी,घुमने के बारे मे,सोचो तो माजुली के बारे जरुर सोचे,परंतु यहां ठहरने के,लिए ज्यादा सुविधाओं से सुसज्जित व्यवस्थाओ की कमी है।सामान्य या गांव जैसी व्यवस्थाऐ ही उपलब्ध है। जैसे बांस के हट……….आदि।