भाजपा में एमआईसी, कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष की लड़ाई

नगर सरकार का चित्र साफ होने के बाद अब इसमें रंग भरने की तेयारी शुरू हो गई है। भाजपा में जहा महापौर परिषद को लेकर घमासान तेज है तो कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष को लेकर तलवारें खींची हुई है।

नितिनमोहन शर्मा

नगर सरकार का चित्र साफ होने के बाद अब इसमें रंग भरने की तेयारी शुरू हो गई है। भाजपा में जहा महापौर परिषद को लेकर घमासान तेज है तो कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष को लेकर तलवारें खींची हुई है। भाजपा में मेयर इन काउंसिल के जरिये एक बार फिर विधायको के चेहतों का शोर तेज हो गया है। भाजपा में परिपाटी शुरू हो गई है कि एमआईसी में विधायकों से उनकी पसन्द के नाम लिये जाएंगे। लिहाजा विधायकों ने ऐसे “कमाऊ पूत” छाट लिए है जो नई परिषद में स्वयम के साथ उनके नेता के लिए भी ” दाना-पानी” जुटा सके।

अब देखना ये है कि पीढ़ी परिवर्तन वाली नई भाजपा मेयर इन काउंसिल में पार्टी का वही पुराना ढर्रा अपनाती है या इस बार कुछ ” प्रयोग” होगा?? नगर निगम चुनाव पूरे होने के बाद भी भाजपा कॉंग्रेस की अंदरुनी राजनीति गरमाई हुई है। भाजपा अंदरखाने में एमआईसी में आने को लेकर शह मात का खेल शुरू हो गया है। विधायक व पार्टी के बड़े नेता अपने चहेते पार्षद को मेयर इन काउंसिल में प्रवेश दिलवाना चाहते है। ठीक वैसे ही जेसे पार्षद टिकट वितरण के समय हुआ, वैसे ही विधायको में अपने पसंदीदा नाम निकाल लिए है और दबाव प्रभाव की राजनीति शुरू हो गईं। उधर सत्ता से फिर दूर रह गई कांग्रेस में ओर कुछ नही तो निगम में नेता प्रतिपक्ष को लेकर घमासान मचा हुआ है।

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पार्टी का एक धड़ा किसी महिला पार्षद को ही फिर से कमान देने के पक्ष में है। दूसरे धड़े की मंशा है कि इस बार भाजपा से दो दो हाथ करने के लिए किसी पुरुष पार्षद को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए। भाजपा के गढ़ विधनासभा 2 में पार्टी को मिली सफलता से उत्साहित कांग्रेस इसी विधनासभा क्षेत्र से किसी को निगम में कमान देने के पक्ष में है। लेकिन ज्यादा जीत के साथ समीकरण महिला नेताओ के पक्ष में जा रहे है।

उधर नए महापौर पुष्यमित्र भार्गव का शपथ समारोह भी उलझा हुआ है। समारोह को भव्य स्वरूप में आयोजित करने की तैयारी तो पूरी जे बस मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का समय नही मिल पा रहा है। दूसरे चरण के नतीजे आने के बाद अब स्थानीय इकाई को उम्मीद है कि दो तीन दिन में शपथ समरोह हो जाएगा। इस खाली समय का उपयोग भार्गव चुनाव बाद का जनसंपर्क कर कर रहे है।

भाजपा एमआईसी: पुराना ढर्रा या कुछ नया होगा??

महापौर परिषद यानी मेयर इन काउंसिल को लेकर भाजपा में वही पुराना ढर्रा चलेगा या फिर पीढ़ी परिवर्तन वाली नई भाजपा कुछ नया करेगी?? ये सवाल भाजपाई गलियारों में ज्यादा चर्चा में है। उम्र का पैमाना तय करने वाली पार्टी क्या इस बार एमआईसी में भी कुछ नया प्रयोग करने जा रही है। अभी तक इस मामले में भी पार्टी अपने नेताओं की की मानती आई है। विधायको से उनकी पसंद के पार्षद नाम ले लिए जाते हैं। अपनी अपनी विधनासभा में जीते पार्षद में से जो विधायक की ” किचन केबिनेट ” का हिस्सा रहता है, वो ही एमआईसी में जाता है।

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मामला चूंकि ” कमाई ” से जुड़ा रहता है, लिहाजा विधायक भी कोई ढिलाई नही बरतते। इसकी शुरुआत टिकट वितरण के समय से ही हो जाती है और “कमाऊ पूत” पहले से ही तय हो जाते है। इस बार भी ऐसा ही है। पार्टी के सभी विधायकों और क्षत्रपों ने अपने अपने नाम मुकर्रर कर लिए है। बस इन्हें चिंता है तो बस एक बात की कही संगठन एमआईसी मामलेमें भी कोई नूतन प्रयोग न कर ले…!! सूत्र बताते है कि इस बार ऐसा ही कुछ होने वाला है और कोई हैरत की बात नही की पहली बार जीते पार्षद भी एमआईसी का चेहरा हो जाये। कारण पार्टी के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ही है।

सूत्र बताते है कि भार्गव की मंशा है कि इस बार की मेयर काउंसिल का स्वरूप उच्च सदन राज्यसभा जैसा हो जहा अध्ययन, उपलब्धि ओर विषय विशेष की विशेषज्ञता शामिल रहती है। अध्ययनशील महापौर भार्गव के आने वाले 5 साल इसी काउंसिल के दम पर रहना है। इसलिए वे चाहते है कि इस मुद्दे पर बगेर किसी मतभेद के सामुहिक रूप से फैसला हो ताकि पूर्व निगम परिषद जैसे अंतर्विरोध न गहराए। एमआइसी में ” कोटा सिस्टम” भी भार्गव की कार्यशैली से मेल नही खाता। अब ये सप्ताहभर में तय हो जाएगा कि हर बार की तरह इस बार भी नेताओ के लाडले लाल और लालियाँ ही ये पद पाएंगे या योग्यता को भी सम्मान मिलेगा?

कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष: चिंटू या रूखसाना..??

कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष को लेकर अंदर ही अंदर लड़ाई ओर तैयारी दोनो तेज है। पार्टी का एक धड़ा फिर से फौजिया अलीम के लिए लामबंदी कर रहा है तो दूसरा धड़ा खजराना से फिर से जीतकर आई रूखसाना खान को इस जवाबदारी देना चाहता है। कांग्रेस में उभरकर आये नई लीडरशिप इस मामले में पुरूष पार्षद के पक्ष में है। इस लीडरशिप के निशाने पर विधनासभा 2 के 2 नेता है।

चिंटू चौकसे ओर राजू भदौरिया। चौकसे तीसरी बार पार्षद बने है। भदौरिया पहली बार। लेकिन दोनों लड़ाके साबित हुए और दोनो ने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओ में प्राण फूंके है। भदौरिया ने तो एक तरह से भाजपा के ” विधायक मैटेरियल” चंदू शिंदे को चुनाव हराया है। वह भी पुलिस थाने ओर जेल में रहकर। नेता प्रतिपक्ष में स्व रामलाल यादव की बहू विनितिका यादव का नाम भी है। अब ये कांग्रेस पर है कि वो बीती निगम परिषद वाला प्रयोग दोहराती है या इस बार निगम गलियारों में भाजपा से शहर हित के मुद्दों पर दो दो हाथ करने के लिए भाजपा जैसा नया प्रयोग करेगी।