बगैर धन मांगे चुनाव लड़ रहे मांगेराम | Mange Ram fighting for election without money

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mangre ram kashyap Poorest Candidate

विश्व विख्यात नाटककार विलियम शेक्सपियर ने कहा था नाम में क्या रखा है, गर गुलाब को हम किसी और नाम से भी पुकारें तो वो ऐसी ही खूबसूरत महक देगा, लेकिन यूपी के मुजफ्फरनगर से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे मजदूर किसान यूनियन पार्टी के प्रत्याशी कदाचित इससे इत्तेफाक नहीं रखते। फिलवक्त उनकी चर्चा देश के सबसे गरीब प्रत्याशी बतौर हो रही है और नाम है मांगेराम कश्यप। चुनाव आयोग को नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामा आज की राजनीति की बहुत सी सच्चाइयों को दरकिनार करता है।

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आमतौर पर माना जाता है कि राजनीति धनाढ्यों का खेल है। फिर धन पार्टी का हो या खुद का या किसी और का। करोड़ों रुपए की संपत्ति के हलफनामे नेता दाखिल कर रहे हैं और सुर्खियां बटोर रहे हैं। एक अध्ययन बताता है कि 2009 में करोड़पति सांसदों की संख्या तीन सौ थी जो 2014 में 430 तक पहुंच गई। सांसदों की औसत संपत्ति भी करीब पंद्रह करोड़ रुपए बैठती है। इससे उलट मांगेराम का हलफनामा कुछ और ही कहानी कहता है।

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उसके मुताबिक उनके पास न तो उनके पास कोई नकदी है न बैंक बैलेंस। अन्य चल-अचल संपत्ति का तो सवाल ही नहीं उठता। ऐसे में चुनाव अभियान कैसे चलता है? मांगेराम बताते हैं भारतीय लोकतंत्र को आम और गरीब लोगों की कुछ ज़्यादा ज़रूरत है। चुनाव प्रचार पैदल ही कर रहे हैं और समर्थकों से मिल रही मदद से बाकी काम हो रहे हैं।

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मुजफ्फरनगर का सांसद कौन होगा इसका फैसला तो मतदाता करेंगे, लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि क्या इन हालातों में मांगेराम चुनाव जीत पाएंगे? शायद नहीं, लेकिन इतना तय है कि कानूनी तौर पर उनकी उम्मीदवारी यह साबित करती है कि भारतीय लोकतंत्र कानून-कायदों से ही संचालित हो रहा है। इसमें गरीबों के लिए भी उतनी ही जगह है, जितनी की अमीरों के लिए है। तभी तो मांगेराम जैसे जनता के नुमाइंदे भी चुनाव लड़ने की स्थिति में हैं।

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