मेजर थापा ने गोलियां खत्म हुई तो भी संगीन से दुश्मनों को दी मौत

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भारत- चीन युद्ध के जांबाज मेजर धन सिंह थापा की वीरगाथा बताने जा रहे है, जिन्होंने युद्ध के दौरान न केवल दो बार चीन के हमले को नाकाम किया बल्कि सैकड़ों की संख्या में दुश्मन सेना को मार गिराया। आइए जानते है उनके बारे में

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आपको बता दे कि मेजर धन सिंह थापा की पूरी वीरगाथा मेजर धन सिंह थापा का जन्‍म 1928 को हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुआ था। मेजर थापा ने अपने सैन्‍य जीवन की शुरूआत 1949 को आठ गोरखा राइफल्स से की थी।

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चीनी सेना ने सरिजान इंडियन पोस्‍ट पर किया था हमला लद्दाख के पांगोंग झील के उत्तर में स्थित सिरीजाप घाटी को चुशुल एयरफील्ड की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था। इस क्षेत्र में किसी भी दुश्मन अतिक्रमण और घुसपैठ को रोकने के लिए 1/8 गोरखा राइफल्स ने सरिजाप -1 नामक एक चौकी स्‍थापित की थी। सरिजाप -1 नामक इन चौकी की कमान उन दिनों मेजर धन सिंह थापा की ‘डी’ कंपनी के एक प्लाटून के पास थी 1962 में चीनी सेना इने इसी चौकी के रास्‍ते भारत पर हमला किया था लगातार चीनी सेना की तरफ से बमबारी हो रही थी। इससे कमांड सेंटर का वायरलेस पूरी तरह से क्षतिग्रस्‍त हो गया था, जिसके चलते कमांड पोस्‍ट पर तैनात जवानों का संपर्क मुख्‍य कमांड से टूट गया था।

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तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मेजर धन सिंह थापा ने दुश्‍मनों से मोर्चा लेने का फैसला किया दुश्‍मन सेना के इस हमले का मेजर थापा ने मुंहतोड़ जवाब दिया. नतीजनत, दुश्‍मन सेना के कई लड़ाके युद्ध क्षेत्र में मारे गए। अपने सैनिकों को लगातार मरता हुआ देख चीनी सेना ने अपने पैर खींचने में ही अपनी भलाई समझी।

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इस बार उसने अपने सैन्‍य बेड़े में टैंक भी शामिल कर लिए थे दुश्‍मन सेना ने तीसरी बार अपनी पूरी ताकत के साथ भारत की इस पोस्‍ट पर हमला बोला, वहीं अब तक दो हमलों का सामना कर चुके मेजर थापा के सैनिक या तो शहीद हो चुके थे या फिर गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। चीनी सेना से लगातार लड़ते हुए मेजर थापा के मौजूद गोलाबारूद और गोलियां भी खत्‍म होने लगी थी। मेजर थापा और उनके बचे हुए जवान जब तक गोलाबारूद था, तब तक वे दुश्‍मन सेना को मुंहतोड़ जवाब देते रहे।

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गोला बारूद और गोली खत्‍म होने पर मेजर थापा और उनके जवान संगीन लेकर चीनी दुश्‍मन पर टूट पड़े। उन्‍होंने अपनी संगीन से कई दुश्‍मनों को मार गिराया इस युद्ध खत्‍म होने के बाद यह धारणा बनी कि युद्ध के दौरान मेजर थापा शहीद हो गए हैं। लेकिन, बाद में पता चला कि मेजर थापा को चीनी दुश्‍मन ने बंधक बना लिया है. इस जानकारी के आधार पर मेजर थापा को चीनी दुश्‍मनों के चंगुल से मुक्‍त कराया गया। युद्ध के दौरान, मेजर थापा के युद्ध कौशल, साहस, नेतृत्‍व झमता के मद्देनजर उन्‍हें सेना के सर्वोच्‍च सम्‍मान परमवीर चक्र से सम्‍मानित किया गया।

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