पंचायती राज में हुआ बड़ा संशोधन, महिलाओं की राह पहले से ओर हुई आसान

देश की राजनीति में सबसे बड़ा 73 वा संशोधन करते हुए महिलाओं की राह आसान हुई। साल 1959 में बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिश के आधार पर पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत सबसे पहले राजस्थान के नागौर से हुई।

देश की राजनीति में सबसे बड़ा 73 वा संशोधन करते हुए महिलाओं की राह आसान हुई। साल 1959 में बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिश के आधार पर पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत सबसे पहले राजस्थान के नागौर से हुई। जिससे 1992 से पहले पंचायतो में महिलाओ की भागीदारी केवल नाम की थी। लेकिन 73वें संविधान संशोधन में महिलाओं को 33 फीसदी का आरक्षण दिया गया। साल 2009 में इसमें एक और बदलाव कर महिलाओं के आरक्षण को बढ़ाकर 50 फीसद कर दिया गया।

साल 1992 में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करने का मिला मौका

महिलाएं समाज के आधे हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से उनकी भागीदारी नाम मात्र ही रही है, इसी क्रम में पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का काम 1992 में 73वें संविधान संशोधन के माध्यम से किया गया, इसके बाद पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित कर दी गईं. इससे महिलाएं सशक्त हुईं. इसके बाद 2009 में इसमें फिर बदलाव किया गया और महिलाओं के आरक्षण को बढ़ाकर 50 फीसद कर दिया गया।

Also Read : इंदौर : संभागायुक्त डॉ शर्मा ने सभी कलेक्टर से वीसी पर की चर्चा, कावंड़ यात्रियों की सुरक्षा के लिए की जाएगी उचित व्यवस्था

अब 50 फीसद प्रतिनिधित्व करेंगी महिलाएं

महिलाओं को पंचायती राज व्यवस्था में 50% आरक्षण देने का नियम बेशक 2009 में लागू हुआ है, लेकिन बिहार ने 2005 में ही इस पहल को मूर्त रूप दे दिया था। बिहार ही पहला राज्य है जहां सबसे पहले 50 फीसद आरक्षण दिया गया था।

इन राज्यों में 50 फीसदी महिलाएं चलाएंगी ग्राम सरकार

आजादी के बाद महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति लगातार दर्ज करा रही हैं, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पंचायती राज अधिनियम महिलाओं के लिए वरदान साबित हुआ है, कई राज्यों में महिलाओं के लिए पंचायतों में आरक्षण को 50 फ़ीसदी कर दिया गया है। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, राजस्थान, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल के नाम शामिल हैं. बाकी राज्यों में भी इससे लागू करने के लिए प्रयास हो रहे हैं।