महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) बुधवार शाम मुंबई की ऑर्थर रोड जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें जमानत देने के आदेश पर रोक लगाने से बॉम्बे हाई कोर्ट के इनकार करने के बाद रिहाई दे दी।

दरअसल अनिल देशमुख को मनी लॉन्ड्रिंग मामले (Money Laundering case) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा नवंबर 2021 में गिरफ्तार किया था। जिसके बाद से वह जेल में बंद थे। आर्थर रोड जेल से रिहा होने के बाद महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने न्यायपालिका को धन्यवाद दिया। कहा, “मुझ पर लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।”

मुझे झूठे आरोपों में फंसाया गया – अनिल देशमुख

उन्होंने कहा कि सुनी-सुनाई बातों के आधार पर उन्होंने आरोप लगाया था, इसे साबित करने के लिए उनके पास कोई सबूत नहीं है।“ इस दौरान देशमुख ने सचिन वझे के खिलाफ भी बयान दिया था। इसके अलावा उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। अनिल देशमुख पर बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वझे के जरिए 100 करोड़ रुपए की वसूली रैकेट में शामिल होने का आरोप है। उनके खिलाफ सीबीआई ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।

Also Read : Madhya Pradesh सुशासन के मामले में आया प्रथम स्थान पर, केंद्र ने जारी की सर्वे रिपोर्ट

गौरतलब हो कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने राकांपा नेता को 12 दिसंबर को जमानत दी थी, लेकिन सीबीआई ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए समय मांगा था और फिर कोर्ट ने जमानत पर 10 दिन के लिए रोक लगा दी थी। इस बीच केंद्रीय जांच एजेंसी ने शीर्ष कोर्ट का रुख किया, लेकिन उसकी अपील पर तत्काल सुनवाई नहीं हुई और मामला जनवरी 2023 में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। क्योकि अभी सुप्रीम कोर्ट का शीतकालीन अवकाश चल रहा है।
बता दें कि सीबीआई ने फिर मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट से एक बार और जमानत पर रोक बढ़ाने का अनुरोध किया था। जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया और फिर 13 महीने बाद अनिल देशमुख के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ़ गया।