नितिनमोहन शर्मा

हिन्दू सम्प्रदायवाद विध्वंसकारी नीतियों के साथ उभर रहा है। विश्व हिंदू परिषद जैसा सन्गठन हिन्दू बहुमत का राज स्थापित करना चाहता है और दूसरे समुदायों को शक्तिहीन बनाकर गुलाम बनाना चाहता है। वह किसी भी बर्बरता के साथ हिन्दू राज्य की स्थापना करना चाहता है। हिंदुओ में संप्रदायकवाद की जड़े कभी आर्य समाज मे ने पैदा की थी। अब उनका नवीनीकरण हो रहा है। ये उस पुस्तक के अंश है जिसे लेकर सरकारी ला कॉलेज में हंगामा मचा। पुस्तक का नाम है सामुहिक हिंसा एवं दाण्डिक न्याय पद्धति।

जेएनयू पर हर दम गरम रहने वाली भगवा ब्रिगेड के लिए इंदौर के ही एक कॉलेज में जेएनयू जैसे हालात हो गए। कॉलेज भी सरकारी लॉ कॉलेज। इस कॉलेज में हिंदुत्व के खिलाफ पाठशाला चल रही थी। कॉलेज की लाइब्रेरी में हिंदु संगठन विरोधी ऐसी पुस्तकें बरामद हुई जिससे भगवा ब्रिगेड का कलेजा थरथरा गया।

पूरे मामले में कॉलेज के प्राचार्य इमानुल रहमान शक के दायरे में है। उनके खिलाफ थाने में मुकदमा भी दर्ज हो गया। उसके बाद उन्होंने इस्तीफा भी दे दिया। प्राचार्य ओर विवादित प्रोफेसर्स की गिरफ्तारी की संभावना भी है। पुरे मामले की जांच के लिए समिति भी बन गई। कॉलेज ने समिति बनाई तो तुरत फुरत उच्च शिक्षा विभाग ने भी समिति का गठन कर दिया।
उच्च शिक्षा विभाग की जांच समिति में विभाग के अतिरिक्त संचालक सुरेश सिलावट शामिल है।

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सिलावट मंत्री तुलसी सिलावट के भाई है। संघ की स्टूडेंट विंग एबीवीपी ने इस पर नाराजगी जाहिर की कि प्राचार्य ईमानुल रहमान को सिलावट बंधुओ का ही प्रश्रय था तो वे क्या ओर केसी जांच करेंगे? इस मसले पर शनिवार को पूरा दिन संघ परिवार सक्रिय रहा। परिषद ने अपनी मातृसंस्था से दो टूक कहा कि इमानुल रहमान का खैरख्वाह कौन है? इसकी जांच करने पर सब साफ हो जाएगा। परिषद का कहना है कि जब तक सरपरस्त सामने नही आते, जांच का कोई औचित्य नही।

प्राचार्य के खास सिलावट ही करेंगे जांच

इतने बड़े घटनाक्रम के बाद बनी जांच समिति भी विवादों के घेरे में है। एक समिति कालेज प्रबंधन ने बनाई थी। लगे हाथ उच्च शिक्षा विभाग ने एक जांच समिति बना दी। उसमे विभाग के अतिरिक्त संचालक सुरेश सिलावट ‘ पप्पू सिलावट’ प्रमुख बन गए। जबकि प्राचार्य को कॉलेज लाने वाले स्वयम सिलावट ही थे। तब कमलनाथ सरकार प्रदेश में थी और एडी के भाई तुलसी सिलावट प्रमुख भूमिका में थे। उच्च शिक्षा विभाग में ला कॉलेज के प्राचार्य को सिलावट बंधुओ का खास ही बताया जाता रहा है। अब प्राचार्य सफाई दी रहे है कि में तो 2018-19 में यहां आया ओर विवादित पुस्तकें 2014 में खरीदी गई। इसकी जानकारी मुझे नही।

लेकिन स्टूडेंट्स का कहना है कि सब कुछ प्रिंसिपल की शह से ही यहां पर हो रहा था। अब जांच वो लोग करेंगे जो स्वयम प्राचार्य के खास है। नतीजतन एबीवीपी ने सुरेश सिलावट की अगुवाई में बनी जांच समिति को भंग कर शासन स्तर पर नई जांच समिति के गठन की मांग बुलंद की है। परिषद तो उच्च शिक्षा विभाग के एडी सुरेश सिलावट को भी जांच के दायरे में लेने का कह रही है कि उनके पूरे कार्यकाल की भी जाँच की जाए कि उन्होंने नियम विरुद्ध जाकर क्या क्या किया है?

कांग्रेस से आये, प्रेम भुला नही पाये

कांग्रेस से भाजपा में तो आ गए लेकिन वर्ग विशेष के प्रति प्रेम और निष्ठाएं भुला नही पाये। उसका ही नतीजा है ये लॉ कॉलेज प्रकरण। ये कहना है आरएसएस से जुड़े एक बड़े दायित्ववान पदाधिकारी का। पदाधिकारी का दावा तो ये भी है कि सब मामलों पर नजर है। इसमे मंत्री तुलसी सिलावट की सांवेर विधानसभा क्षेत्र में बाटे गए पट्टों का मामला भी है जो बहुतायत में वर्ग विशेष के लोगो को दिए गए है। सूत्र बताते है आरएसएस के कोर ग्रुप ने इस पूरे मसले को बेहद गम्भीरता से लिया है। यही कारण रहा कि कल प्राचार्य के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज हुई है। गिरफ्तारी भी हो सकती है।

15-17 साल से सत्ता, और ये हाल

15 – 17 साल से भाजपा प्रदेश में सत्ता में है और इस प्रकार हिंदुत्व की सेवा हो रही है। वो भी इंदौर जैसे शहर में जहा आरएसएस का नेटवर्क सबसे मजबूत है? ये सवाल मामला सामने के बाद बिफरे परिषद कार्यकर्ताओं ने अपने पदाधिकारियों से किया। इसके बाद आरएसएस की शरण भी ली गई। संघ को पूरा मामला बताया गया और सख्त कार्रवाई की दरकार की गई। बताते है इस मामले में संघ भी खासा नाराज है कि सत्ता की चाह में विचारधारा का किस तरह का नुकसान निरंतर हो रहा हैं।