कन्या पूजन में रखें इन बातों का ध्यान, वरना मिलेगा श्राप | Keep these points in mind during Kanya Poojan in Navratri

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गुड़ी पड़वा से नवरात्रि का पर्व भी शुरू हो गया है। नौं दिन के यह त्यौहार 6 अप्रैल से शुरू होकर 14 अप्रैल यानी रामनवमी तक चलेगा। नवरात्रि के नौं दिन माता के नौं रूपों की अराधना की जाती है। देवी मंदिरों में भी भक्तों का तांता लगा रहता है। नवरात्रि में कन्या पूजन का भी अपना एक अलग महत्व होता है। भक्त अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन करते हैं। कन्या पूजन करने के कुछ नियम होते है जिन्हें आपको ध्यान रखना चाहिए। इन नियमों का पालन नहीं करने से आपको कन्या पूजन का फल नहीं मिलेगा और देवी भी नाराज हो जाएंगी।

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कन्या पूजन के नियम

श्रीमद् देवीभागवत के मुताबिक कन्या पूजन के भी अपने कुछ नियम है। इन नियमों के मुताबिक़ कन्या पूजन में एक साल की कन्या को नहीं बुलाना चाहिए। ‘कुमारी’ कन्या वह कहलाती है जो दो वर्ष की हो चुकी हो, तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छ वर्ष की कालिका, सात वर्ष की चण्डिका,आठ वर्ष की शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती हैं।

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दस साल के बड़ी कन्या का पूजन नहीं करना चाहिए। कन्या पूजन करने के बाद आप प्रसाद ग्रहण कर सकते है। कन्या पूजन करने से दरिद्रता का नाश, शत्रुओं का क्षय और धन, आयु की वृद्धि होती है तो वहीं विद्या, विजय, सुख-समृद्धि भी हासिल होती है।

कन्या पूजन का महत्व

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्त्व होता है। इन नौं दिनों में अष्टमी और नवमी को कन्याओं का विशेष पूजन किया जाता है। उन्हें घर बुलाकार उनके पैर धोएं जाते है। उन्हें आसन पर बैठाकर उन्हें भोजन कराया जाता है, फिर दक्षिणा और भेंट देकर विदा किया जाता है।

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