दो छात्राओं को स्कूल से निकालने पर भड़के कमलनाथ, दिए जांच के आदेश

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मुख्यमंत्री कमलनाथ ने धार में एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली दो बहनों को स्कूल से निकालने की घटना को लिया गंभीरता से ,निर्देश दिए पूरे मामले की जांच हो ,बेटियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय ना हो, बेटियाँ शिक्षा से वंचित ना हो, उनका स्कूल में दोबारा प्रवेश सुनिश्चित किया जावे.

धार के मांडव रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली नेपाली मूल की दो बहनो अनुष्का और अवनिशा को स्कूल से निकालने की घटना को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गंभीरता से लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय ना हो, उन्हें पढ़ाई से वंचित ना होने दिया जाये। एक तरफ तो हम नारा देते हैं “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ “, दूसरी तरफ़ बेटियों को स्कूल से निकाले जाने की घटना ,बेहद आपत्तिजनक है।

मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिए कि पूरे मामले की तत्काल जांच की जाये ,बेटियां वापस स्कूल में पढ़ाई करें ,यह सुनिश्चित किया जाये और इसमें अभिभावको की कोई ग़लती भी जाँच में सामने आती है तो उसके आधार पर बच्चियों को स्कूल से निकालने का निर्णय पूरी तरह से ग़लत है।

भले इन बच्चियों ने देश के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाई है लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते ,प्रदेश की जनता के प्रति प्रथम दायित्व मेरा है।बहन- बेटियों साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं हो, उनके सम्मान को ठेस ना पहुँचे, यह मेरा दायित्व व कर्तव्य है। इसको लेकर मेरी सरकार सदैव वचनबद्ध है।

पीएम मोदी ने लगाईं मदद की गुहार-

पाँचवी और आठवीं में पढ़ने वाली दो छोटी बच्चियों ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर अपने साथ हो रहे भेदभाव की शिकायत की है। उन्होंने चिट्ठी में अपनी पीड़ा बयान करते हुए कहा है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे और यहाँ का स्टाफ नेपाली कहकर चिढ़ाते हैं। जब इसकी शिकायत स्कूल प्रबन्धन से की तो उन्होंने इस मामले में कार्यवाही करने के बजाए दोनों छात्राओं को स्कूल से ही निकाल दिया। जिला शिक्षा अधिकारी का दावा है कि इस तरह किसी मित्र देश के विद्यार्थी से भेदभाव कर उसे स्कूल से निकाल देना ग़लत है।

यह मामला धार के प्रतिष्ठित ऐमिनेंट पब्लिक स्कूल का है। स्कूल में दो नेपाली बहनें अवनिशा खड़का आठवीं में और अनुष्का पाँचवी में पढ़ती हैं। वे इसी स्कूल में नर्सरी से लगातार पढ़ती आ रही हैं। लेकिन यहाँ सहपाठी बच्चों और शिक्षकों ने उनके साथ कभी अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है। उन्हें नेपाली-नेपाली कहकर चिढ़ाया जाता है।