सियासत में जमकर भड़ रहे हैं रामपुर के शोले | Fiercely burning in Politics in Rampur

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jaya prada ajam khan

हिंदी सिनेता जगत की यादगार फिल्म शोले और उसमें बताया गांव रामपुर किसी को याद दिलाने की जरूरत नहीं। रामपुर के शोले तो इन दिनों भी भड़क रहे हैं, लेकिन फिल्मी नहीं। सैट सियासत का है और इसकी एक पात्र हैं समाजवादी दिग्गज आजम खान तो दूसरी पात्र है हाल ही में भाजपा का दामन थामने वाली अभिनेत्री जयाप्रदा।

दरअसल, जयाप्रदा समाजवादी दिग्गज अमरसिंह का मोहरा है, जिनकी कभी आजम खान से बनी नहीं। इसी कारण वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जयाप्रदा को भाजपा का टिकट दिला लाए। बहरहाल, यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन आजम खान की तीखी या अनर्गल बयानबाजी जयाप्रदा पर सामान्य मर्यादाओं को लांघकर भी जारी रहेगी, इसकी कल्पना नहीं की जा रही थी। उनकी बयानबाजी को लेकर ही एक बार जयाप्रदा को कहना पड़ा था कि मैं अमरसिंह को राखी भी बांध दूं तो क्या वे इसे स्वीकार लेंगे।

इससे भी कहीं आगे जाकर बीते दिनों आजम खान यह कहते सुने गए कि- ‘जिसको हम ऊंगली पकड़कर रामपुर लाए, आपने एक दशक जिससे अपना प्रतिनिधित्व कराया… उनकी असलियत समझने में आपको सत्रह बरस लगे, लेकिन मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवियर खाकी रंग का है। यह बताना शायद जरूरी नहीं कि खाकी नैकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहचान है।

वैसे इस मामले में आजम की सफाई थी कि मैंने फिल्म अभिनेत्री और भाजपा की उम्मीदवार जयाप्रदा के खिलाफ किसी तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की है। जो भी हो उनके खिलाफ एफआईआर हो चुकी है और तमाम बड़े नेता इस घटनाक्रम की तीखी आलोचना भी कर चुके हैं। आजम की बदजुबानी के कारण ही चुनाव आयोग ने भी उनपर 48 घंटे तक न बोलने का प्रतिबंध भी लगाया है, जो एक इतिहास है।

उधर इस बयान पर जयाप्रदा ने यहां तक कह डाला कि क्या मेरे मरने से आपको चैन मिल जाएगा? मुझे नहीं पता कि मैंने उनके साथ ऐसा क्या कर दिया कि वे ऐसी बातें कर रहे हैं। मैं 2009 में उनकी पार्टी से चुनाव लड़ रही थी तब भी उन्होंने मेरे खिलाफ टिप्पणी की तो किसी ने भी मेरा समर्थन नहीं किया। मैं एक महिला हूं और जो कहा वह मैं दोहरा भी नहीं सकती। बदजुबानी का यह सिलसिला कब तक चलेगा इसका जवाब तो खान ही दे सकते हैं।

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