Indore: जिले में प्राकृतिक खेती बनेगी जन आंदोलन, 3 हजार प्रेरक गांव में जगायेंगे प्राकृतिक खेती का अलख

इस कार्य योजना के अनुसार प्राकृतिक खेती का अलख जगाने के लिए गांव वार प्रेरक तैयार किए जा रहे हैं। प्रत्येक गांव में पांच-पांच किसानों को प्रेरक के रूप में तैयार किया जा रहा है, जो स्वयं प्राकृतिक खेती करने के साथ ही दूसरों को भी प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करेंगे।

इंदौर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुसार इंदौर जिले में प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाया जाएगा। जन आंदोलन बनाने के कार्य की शुरुआत कर दी गई है। प्राकृतिक खेती को गाँव-गाँव तथा खेत-खेत पहुँचाने के लिये कलेक्टर मनीष सिंह की पहल पर व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस कार्य योजना के अनुसार प्राकृतिक खेती का अलख जगाने के लिए गांव वार प्रेरक तैयार किए जा रहे हैं। प्रत्येक गांव में पांच-पांच किसानों को प्रेरक के रूप में तैयार किया जा रहा है, जो स्वयं प्राकृतिक खेती करने के साथ ही दूसरों को भी प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करेंगे। कलेक्टर मनीष सिंह आज यहां महू क्षेत्र के लिए नियुक्त किए जाने वाले प्रेरकों के बीच पहुंचे। सिमरोल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कलेक्टर मनीष सिंह ने प्रेरकों का हौसला बढ़ाया और उन्हें प्राकृतिक खेती की अलख जगाने के लिए प्रोत्साहित किया।

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इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वंदना शर्मा, महू के एसडीएम अक्षत जैन सहित कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि रासायनिक खेती जमीन और मानव जीवन दोनों के लिए हानिकारक होती जा रही है। अब हमें रासायनिक खेती से बचना होगा। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री चौहान की मंशा है कि गांव-गांव तक प्राकृतिक खेती का प्रसार हो। उन्होंने कहा कि जैविक खेती की तुलना में प्राकृतिक खेती ज्यादा लाभदायक है। यह कम खर्चीली है। इससे किसान आत्मनिर्भर बनेंगे।

उन्होंने कहा कि किसान आगे आकर प्राकृतिक खेती को अपनाएं। इसके लाभ देंखे। सबसे पहले वे कम से कम एक बीघा या एक एकड़ में प्राकृतिक खेती करके देखें, लाभ दिखाई देने पर इसका रकबा और बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि इंदौर जिले में प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाया जायेगा। प्राकृतिक खेती के संबंध में जागरूकता लाने के लिये गांव वार पांच-पांच प्रेरक तैयार किये जा रहे हैं, जो स्वयं प्राकृतिक खेती को करेंगे ही साथ ही दूसरे किसानों को भी प्राकृतिक खेती के लिये प्रोत्साहित करेंगे। इन प्रेरकों को प्रशिक्षित करने के लिये विकासखण्ड स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्राकृतिक खेती के विशेषज्ञों के साथ ही अन्य प्रगतिशील किसान प्रेरकों को प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से सेद्धांतिक और व्यवहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं।

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जिले में किसान बड़ी संख्या में प्राकृतिक खेती के लिये आगे आ रहे है। अनेक किसानों ने आज संपन्न हुए कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती के लिये अपनी रुचि जाहिर की। इन्हीं में से एक किसान शशि कुमार पाल का कहना है कि प्राकृतिक खेती वास्तव में लाभप्रद है। अब हमे इसकी जानकारी मिली। इसके फायदे पता चले। अब हम निश्चित ही प्राकृतिक खेती करेंगे। इसी तरह के कुछ विचार सौ बीघा खेत के मालिक साजिद खान ने भी व्यक्त किये।

जितेन्द्र पाटीदार, मनोहर शारदिया ने भी प्राकृतिक खेती के लिये अपनी रुचि प्रदर्शित की। इन्होंने कहा कि हम सब प्रेरक बनेंगे। स्वयं तो खेती करेंगे, दूसरो को भी प्रेरणा देगें। कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती के विशेषज्ञ मारूति माने, सुरेश कुमार तिवारी, संतोष सौमवतिया ने किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में दिनेश सलवाडिया ने आभार माना। कार्यक्रम में उप संचालक कृषि शिव सिंह राजपूत, आत्मा परियोजना के संचालक शर्ली थॉमस, उप संचालक उद्यानिकी वास्कले सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती करने के सेद्धांतिक और व्यवहारिक तौर तरीके समझाएं गए।

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