इंदौर : रियल एस्टेट कारोबार पर जी. एस. टी. के प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गयी

0
54
income tax

टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन, इंदौर एवं क्रेडाई इंदौर के संयुक्त तत्वाधान में जाल सभागृह में रियल एस्टेट कारोबार पर जी. एस. टी. के प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गयी ! कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिल्ली के सी.ए. अशोक बत्रा ने बताया कि जी.एस.टी. के अंतर्गत केवल निर्माण के दौरान बेचे जानेवाले यूनिट्स पर ही टैक्स देना होता है ! एक बार कार्य सम्पूणता प्रमाण पत्र (कम्पलीशन सर्टिफिकेट) आने के बाद चूँकि वह स्थिर सम्पति (फिक्स्ड एसेट्स) की श्रेणी में आ जाती है अतः उस पर केंद्रीय सरकार को कर लेने का अधिकार समाप्त हो जाता है !

बत्रा ने बताया कि बिल्डर्स द्वारा विभिन्न बिज़नेस मॉडल जैसे जॉइंट डेवेलोपमेन्ट एग्रीमेंट, Revenue शेयरिंग, प्लाट डेवलपमेंट के अंतर्गत कार्य किया जाता है! उनके द्वारा इन सभी मॉडल्स पर लागू होने वाले जी. एस .टी. के अलग अलग प्रावधानों की व्याख्या की ! उन्होंने ये भी बताया की बिल्डर्स द्वारा उपभोक्ता से विभिन्न अलग अलग नामों जैसे क्लब हाउस, बिजली, कार्नर फेसिंग आदि के नाम से पैसे लिए जाते है उन पर भी कम्पोजिट सप्लाई मानते हुए १ या ५% की दर से ही टैक्स लगेगा !

दूसरी वक्ता मुंबई की सी. ए. पायल शाह ने कहा कि दिनांक १/४/२०१९ के बाद से बिल्डर्स पर कर कि दरों में काफी परिवर्तन किया गया है ! दिनांक ३१/०३/२०१९ तक बिल्डर्स को सेल वैल्यू का १२% टैक्स देना पड़ता था जिसमे बिल्डर को इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने की भी पात्रता थी वह अब ५% (बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट) कर दी गयी है ! वही ऐसे छोटे फ्लैट जहाँ फ्लैट की साइज ६० स्क्वायर मीटर तक एवं सेल वैल्यू ४५ लाख से कम हो ऐसे केसेस में कर की दर पूर्व में ८% (इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ) थी जो घटाकर १% (बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट) कर दी गयी है! उन्होंने यह भी कहा की उपरोक्त घटी हुई दरों के साथ यह भी नियम लागू है की बिल्डर को अपनी ८०% परचेस रजिस्टर्ड पर्सन यानि टैक्स देकर ही करना होगी ! उससे कम की दशा में ८०% से जितना कम होगा उस पर १८% की दर से रिवर्स चार्ज में टैक्स भरना होगा ! उन्होंने बताया की कमर्शियल काम्प्लेक्स की दरों एवं प्रावधानों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है एवं इन पर पूर्ववत १२% (इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ) की दर लागू होगी !

उन्होंने यह भी बताया की इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाने के कारण बिल्डर्स के लिए उनके द्वारा ख़रीदे जाने वाले माल एवं सेवाओं पर दिए कर को लागत में जोड़ने के कारण उनके द्वारा सेल प्राइस बढ़ा दी गयी जिसके कारण घटती दरों का खरीदने वाले को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है !

क्रेडाई इंदौर के चेयरमैन श्री लीलाधर माहेश्वरी ने सभा को सम्भोदित करते हुए कहा कि वैसे ही रियल एस्टेट व्यापर पिछले कई सालो से नोट बंदी, RERA एवं जी. एस. टी. से मंदी की चपेट में है एवं रोज नए नए प्रावधानों के कारण उन्हें समझ कर क्रियान्वित करना मुश्किल हो रहा है !

टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री मनोज गुप्ता ने कहा कि सरकार द्वारा समय समय पर जी. एस. टी. के प्रावधानों में इतना परिवर्तन कर दिया गया है की एक प्रोफेशनल को स्वयं को अपडेट रखना मुश्किल हो रहा है ! पहले तो साल में एक बार ही बजट में परिवर्तन होता था परन्तु अब हर माह जी.एस.टी. कौंसिल की मीटिंग होती है एवं उसके अनुसार हर माह में परिवर्तन हो रहे है जिसे रोकना होगा ! कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट, टैक्स कंसलटेंट, एडवोकेट्स एवं क्रेडाई इंदौर के सदस्य उपस्थित थे !

कार्यक्रम का संचालन टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के सचिव सी. ए. कृष्ण गर्ग ने किया ! आभार प्रदर्शन सी. ए. J P सराफ द्वारा किया गया ! उपरोक्त जानकारी टैक्स प्रैक्टिशनर एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी श्री स्वप्निल जैन द्वारा दी गयी !

(स्वप्निल जैन )

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here