इंदौर धर्मदर्शन : रामायण कालीन गरुड़ तीर्थ है देव गुराड़िया, 7 वीं सदी का है वर्तमान मन्दिर

भगवान गरुड़ ने रामायण काल में इस स्थान पर तपस्या की थी ततपश्चात लक्ष्मण जी को नागफांस से मुक्त कराया था । 7 वीं सदी का है वर्तमान मन्दिर, माँ अहिल्या ने करवाया जीर्णोद्धार। करीब है क्षिप्रा उद्गम स्थल, केवड़ेश्वर महादेव

इंदौर (Indore) रेलवे स्टेशन से करीब 14 किलो मीटर दूर स्थित देव गुराड़िया (Dev Guradiya) मन्दिर एक प्राचीन देवस्थान है । इस स्थान को गरुड़ तीर्थ भी कहा जाता है । मान्यता है कि भगवान गरुड़ ने रामायण काल में इस स्थान पर तपस्या की थी ततपश्चात लक्ष्मण जी को नागफांस से मुक्त कराया था । मन्दिर के पास ही ऊँची पहाड़ी भी है जिसे देवगुराड़िया पर्वत कहा जाता है । यहां प्राचीन समय से महाशिवरात्रि पर मेला लगता आ रहा है ।

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7 वीं सदी का है वर्तमान मन्दिर, माँ अहिल्या ने करवाया जीर्णोद्धार

वर्तमान देवगुराड़िया मन्दिर 7 वीं सदी का बना हुआ बताया जाता है । इंदौर की महारानी और भारत का गौरव माँ अहिल्या के द्वारा मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया गया । मन्दिर में स्थापित आकार में छोटे शिवलिंग को गुटकेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है । शिवलिंग के नजदीक ठीक ऊपर गौमुख आकृति बनी है । सावन और भादौ के महीने में इस गौमुख के द्वारा शुद्ध जल निकलता है जिसे भगवान गुटकेश्वर महादेव का प्राकृतिक अभिषेक होता रहता है । मन्दिर प्रांगण में कुल पाँच जल के कुंड बने है जो सदा भरे रहते हैं हालांकि गर्मियों में स्तर बहुत कम हो जाता है ।

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करीब है क्षिप्रा उद्गम स्थल, केवड़ेश्वर महादेव

देवगुराड़िया से कुछ एक कि.मी. अंदर की ओर चलकर भारत की प्रमुख धार्मिक नदियों में से एक क्षिप्रा नदी का उद्गम स्थल ग्राम उज्जैनी कांकड़ है, जहां एक छोटी पहाड़ी पर माँ क्षिप्रा का उद्गम कुंड और मंदिर बना हुआ है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा शुरू की गई नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना का केंद्र भी यहीं हैं। इस जगह को पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित किया गया है। वहीं कुछ दुरी पर अत्यंत प्राचीन केवड़ेश्वर महादेव का मंदिर है। यह स्थान भी प्राचीन काल से सिद्ध ऋषि मुनियों की तपोस्थली रहा है। सिद्द संत त्रयंबकपूरी महाराज ने भी यहीं साधना की और वर्तमान में उनके शिष्य धर्मेंद्र पूरी महाराज यहां के महंत हैं। कुछ आगे चलकर कम्पेल गाँव है जो माँ अहिल्या का गादी स्थल है जिसे उनकी छोटी राजधानी भी कहा जाता है। यहीं माँ अहिल्या कालीन प्राचीन गोवर्धननाथजी का दुर्लभ मंदिर है।