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इंदौर: गांधी के विचारों को समझने का बड़ा मौका, 10-11-12 दिसम्बर को राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

किसी भी राष्ट्र के विकास की पहली अहम शर्त है कि वहां की आंतरिक शांति और राष्ट्र के नागरिकों का अपने वतन के प्रति समर्पण भाव और अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना।

इंदौर। किसी भी राष्ट्र के विकास की पहली अहम शर्त है कि वहां की आंतरिक शांति और राष्ट्र के नागरिकों का अपने वतन के प्रति समर्पण भाव और अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना। इसी भावना को लेकर यूनिवर्सल पीस एंड सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी 10 दिसम्बर, शुक्रवार से एक तीन दिवसीय वृहद, बौद्धिक और सामाजिक अनुष्ठान करने जा रही है, जिसमें मुख्यतः गाँधीवाद के विचारों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता अपने विचारों से आयोजन की गरिमा बढ़ायेंगे। तीन दिवसीय आयोजन 10-11-12 दिसम्बर 2021 को होगा।

यह जानकारी कार्यक्रम संयोजक मुकुन्द कुलकर्णी, आलोक खरे एवं शफी शेख ने देते हुए बताया कि यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का मुख्य विषय शांति और विकास है जिसका शुभारंभ 10 दिसम्बर, 2021 को दोपहर 3ः30 बजे श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति के शिवाजी सभागार में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के प्रभारी कुलपति डॉ. अशोक शर्मा के मुख्य आतिथ्य में होगा।

कार्यशाला के पहले सत्र में महाराष्ट्र के गाँधीवादी कार्यकर्ता रमेश ओझा, सेवानिवृत्त इनकम टैक्स कमिश्नर डॉ. आर.के. पालीवाल, गुजरात के रवीन्द्र रुकमीनी गाँधीवाद पर बात करेंगे। 11 दिसम्बर 2021 को धार्मिक सद्भाव पर फादर वर्गिस, विजय तांबे मुंबई, डॉ. अनिल भंडारी, गुजरात के हर्षद रावल, डॉ. खुशालसिंह पुरोहित (रतलाम), डॉ. पुष्पेन्द्र दुबे, निलेश देसाई (गुजरात) के उद्बोधन होंगे।

मीडिया प्रभारी प्रवीण जोशी ने बताया कि तीन दिनों में पांच सत्र होंगे, जिसमें गाँधीवादी विचारकों के अलावा गाँधीवाद पर शोधार्थी भी शामिल होंगे। राष्ट्रीय कार्यशाला के अंतिम दिन शांति और विकास पर वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरेराम वाजपेयी, अरविंद पोरवाल, कुमार सिद्धार्थ, रामेश्वर गुप्ता और वर्धा के कुलपति डॉ. सुगन बरंत के उद्बोधन होंगे। 11 और 12 दिसम्बर को राष्ट्रीय कार्यशाला सुबह 10 बजे से लेकर शाम तक चलेगी।

आलोक खरे ने बताया कि दरअसल इसी तरह का आयोजन हमारी संस्था पूर्व में गाँधीजी की 150वी जयंती प्रसंग पर भी कर चुकी है, जिसमें अभ्यास मंडल, श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, कस्तूरबा गाँधी न्यास, गाँधी शांति फाउंडेशन, समाज सेवा प्रकोष्ठ, सद्भावना प्रतिष्ठान, डेवलपमेंट फाउंडेशन, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर सहयोगी संस्था थी। आयोजन को सफल बनाने की अपील सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अनिल भंडारी, आर.के. जैन, श्याम पांडे, अतुल कर्णिक, अशोक मित्तल आदि ने की है।