इंदौर। एटैक्सिया अवेयरनेस सोसायटी द्वारा दिनांक 8-9 अक्टूबर 2022 को एटैक्सिया के पेशेंट के लिए अक्षत गार्डन, फूटी कोठी, रिंग रोड, इंदौर में 2 दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के शिखर सम्मेलन का आयोजित किया जा रहा है। इसमें दोनों दिन सुबह 9.30 बजे से शाम तक विभिन्न कार्यक्रम होंगे। पिछले 35 वर्षों से एटेक्सिया से पीड़ित संस्था की संस्थापक स्वस्ति वाघ, संरक्षक मार्गदर्शक ख्यातिलब्ध न्यूरालॉजिस्ट डॉ. ए. पुराणिक, सचिव नरेन्द्र एदलाबादकर, कोषाध्यक्ष जागृति उपासनी, सह सचिव ज्योति जोशी, उपाध्यक्ष डॉ. ज्योत्स्ना भीरास्कर के साथ ही अशोक द्विवेदी, एस. सोनी, तथा बॅनर्जी ने प्रेस क्लब इंदौर में गुरुवार को पत्रकारों को शिखर सम्मेलन की विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि यह शायद भारत में पहली बार है, जहां इस प्रकार का शिखर सम्मेलन विशेष रूप से मरीजों के लिए आयोजित किया जा6 रहा है। इस सम्मलेन में भाग लेने के लिए भारतवर्ष के गुजरात, पुणे, मुंबई, दिल्ली आदि से प्रतिभागी मरीज आ रहे हैं। ऐसे मरीजों की विशिष्ट जरूरतों को देखते हुए सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। राष्ट्रीय स्तर के चिकित्सा संस्थानों एम्स, नई दिल्ली, आईजीआईबी बैंगलोर और हैदराबाद के एटैक्सिया डोमेन विशेषज्ञ 8 अक्टूबर को होने वाली ऑनलाइन पैनल चर्चा के माध्यम से अपना बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान करने जा रहे हैं। मरीजों के लिए फिजियोथेरेपी सत्र आयोजित करने के लिए मुंबई से फिजियोथेरेपिस्ट की एक टीम वहां होगी। समिट में स्पीच थेरेपी और मोटिवेशनल टॉक के सत्र भी होंगे।

अटेक्सिया जागरुकता समिति (AAS) के विषय में जानकारी

एटेक्सिया एक ऐसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी है जो मरीज़ के मस्तिष्क के मांसपेशियों को प्रभावित करती है और उन्हें नुकसान पहुंचाती है। एटेक्सिया जागरुकता समिति (AAS), जो कि म.प्र. पंजीयन अधिनियम 1973 के अंतर्गत पंजीकृत पंजीयन क्र. 03/27/01/20166/17) एक गैर सरकारी संस्था है, ऐसे मरीजों को सहायता और सहयोग करने वाली भारत की एकमात्र संस्था है।

इस संस्था की स्थापना सन् 2018 में स्वस्ति वाघ, जो कि स्वयं पिछले 35 वर्षों से एटेक्सिया से पीड़ित है। इंदौर के ख्यातिलब्ध न्यूरालॉजिस्ट डॉ. ए. पुराणिक, इसके संरक्षक तथा मार्गदर्शक है। इनके अलावा समिति में नरेन्द्र एदलाबादकर (सचिव), जागृती उपासनी (कोषाध्यक्ष), ज्योति जोशी (सह सचिव), डॉ. ज्योत्स्ना भीरास्कर (उपाध्यक्ष) और एस सोनी, द्विवेदी तथा बॅनर्जी सदस्य के रूप में कार्यरत हैं।

AAS एटेक्सिया के मरीजों को कई प्रकार से अलग अलग मोचों पर सहायता करता है।

1. जागरुकता शिविर का आयोजन कर इस गंभीर और दुर्लभ बीमारी के विषय में ऑनलाइन या ऑफलाइन जानकारी प्रसारित करना।

2. एटेक्सिया के मरीजों के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र की व्यवस्था और वितरण हेतु शिविर आयोजित करना।

3. एटेक्सिया के मरीजों को शारीरिक सहायता यथा व्हीलचेयर चलने में सहायक उपकरण, अन्य आवश्यक और संबंधी व्यायामों की जानकारी देना।

4. एटेक्सिया मरीजों की स्वास्थ्य जांच हेतु शिविर तथा डी एन ए जांच हेतु सहयोग और सुविधा उपलब्ध
कराना

5. मरीजों को सकारात्मक जीवन शैली के संबंध में मनोवैज्ञानिक और प्रेरक परामर्शदाताओं के द्वारा उद्बोधन सत्र की व्यवस्था

6. एटेक्सिया उन्मूलन और निदान संबंधी अनुसंधान को बढ़ावा देना आदि। पूरी जानकारी संलग्न विवरणिका में उपलब्ध है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाइट https://ataxiaindia.com पर भेंट दे सकते है।

एटेक्सिया बीमारी क्या है

एटेक्सिया एक विरले (rare) प्रकार की मस्तिष्क संबंधी बीमारी है। इसमें मरीज़ के विभिन्न अवयवों के बीच का स्वाभाविक समन्वय कमजोर होने लगता है। जो लोग इस बीमारी का शिकार होते हैं उनके तंत्रिका तंत्र (nervous system) का नियमन कमजोर होने लगता है, जिसके कारण शरीर के विभिन्न अवयवों के हलचल हेतु आवश्यक सामंजस्य कम होकर नुकसान होता है। एटेक्सिया आपकी उंगलियां, हाथ, पांव, शरीर, बोलने की शक्ति एवं आँखों की पुतलियों के हलचल पर भी असर डालता है।

ये बीमारी विशेषकर आपके शारीरिक अंगों के समन्वय, सामंजस्य और सन्तुलन पर सर्वप्रथम असर डालती है हाथ, पांव, शरीर का डगमगाना, जीभ का लडखडाना आदि ऐसे प्रारंभिक लक्षण है जो दिन प्रतिदिन बढ़ते जाते हैं और मरीज़ अंततः व्हीलचेयर के सहारे पर ही रह जाता है। एटेक्सिया की पूरी जांच और रोग की अचूक पहचान के लिए कई स्तरों पर काम होता है। मरीज़ के पिछले वर्षों के स्वास्थ्य की जानकारी, पारिवारिक पृष्ठभूमि तथा आनुवंशिक बीमारी का इतिहास, उसका पूरा न्यूरालॉजिकल परीक्षण, MRI तथा स्कैन आदि सहित सभी की गहराई से जांच की जाती है तभी निश्चित किया जाता है। लेकिन सामान्यत: DNA जांच अंतिम और निर्णायक होती है.